बागवान

#बागवान नाम सुनते ही हमारे आँखों के सामने हेमामालिनी और अमिताभ बच्चन की फिल्म आँखों के सामने घूमने लगती है। वाकई इस फिल्म की पटकथा बहुत ही हृदय स्पर्शी और मार्मिक है जिसको बहुत ही खूबसूरती से फिल्माया गया है।
प्रायः फिल्मों और कहानियों में किसी एक पक्ष को नायक तथा दूसरे पक्ष को खलनायक दिखा दिया जाता है जो कि पूर्ण सत्य नहीं होता है। और जहाँ सवाल बुजुर्गों का आता है तब तो समूचे युवा पीढ़ी को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है चाहे वह कितनी ही समस्याओं से जूझ क्यों न रहीं हों।

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आई हैव अ प्राब्लम

तब मैं फेसबुक पर नई नई आई थी। मदर्स डे था और सभी फेसबुक फ्रेन्ड्स के बेटे – बेटियाँ बड़े ही खूबसूरत और प्यारे शब्दों में शुभकामनाएँ दे रहे थे जिसे पढ़कर मुझे खुशी तो बहुत हो रही थी लेकिन कहीं न कहीं मेरे मन के कोने में भी एक चाहत थी कि काश मेरे बेटे भी मुझे ऐसी ही कुछ शुभकामनाएँ भेजते।

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वर्तमान समय में साहित्य और समाज का सम्बन्ध।

वर्तमान समय में साहित्य जगत में एक अभूतपूर्व क्रान्ति आई है जिसका एक कारण महिलाओं का साहित्य जगत में प्रवेश भी है। चुकीं महिलाएँ सम्बन्धों को जोड़ने में मुख्य भूमिका निभाती आईं हैं अतः साहित्य जगत में भी नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी को आपस में जोड़ने का काम कर रही हैं, जिससे आज की पीढ़ी का भी रुझान हिन्दी की तरफ बढ़ रहा है।

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मन्नत

ओपेन हार्ट सर्जरी के बाद कुछ परिजन इष्ट – मित्र मुझसे मिलने आ रहे थे तो कुछ फोन पर ही हाल चाल पूछ लेते थे लेकिन मेरी सबसे पक्की सहेली साधना का न तो काॅल आया और न ही वह खुद ही आई जिस वजह से मैं अन्दर ही अन्दर काफी दुखी रहने लगी थी और मेरी आँखें हमेशा ही साधना के लिए ही प्रतीक्षारत।

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लोक तंत्र का देखो मेला

लोक तंत्र का देखो मेला ।
आपस में ही हुआ झमेला।।

लड़ते हैं फिर भाई – भाई।
हुई देख बेचारी माई।।

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