जय माँ


ईशाना , सत्या , शिवा , नित्या दुर्गा नाम |
सर्व मंगला अम्बिका,शत् शत् तुम्हें प्रणाम ||
वाम हस्त शोभित कमल , दाएँ हाथ त्रिशूल |
शैलपुत्री वृष वाहिनी , क्षमा करो माँ भूल ||

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दलित बाभन

ब्रम्ह की लिखी कहानियाँ तो हमारे आस-पास में बिखरी पड़ी हैं जिसे हुनरमंद लेखनी पन्नों पर उतार कर जन – जन तक पहुँचाने में सफल हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही करिश्मा शम्भू पी सिंह जी की लेखनी कर गई है जिसकी बदौलत खूबसूरत तथा रोचक कहानियों का संग्रह दलित बाभन खूबसूरत कवर पृष्ठ में सुसज्जित होकर पाठकों का ध्यान स्वतः ही अपनी ओर आकृष्ट कर रही हैं ।

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भैरवी

आज यूँ ही समाचार पत्र पर साहित्य पेज को पलटा तो एक जानी पहचानी सी खूबसूरत तस्वीर पर मेरी नज़रें ठहर गईं ! फिर नाम मैंने नाम देखा तो भैरवी ! बला की खूबसूरत तो थी ही अब तो भैरवी और भी खूबसूरत लग रही थी इस तस्वीर में ! देखकर तो ऐसा लग रहा था कि यदि सौन्दर्य की प्रतियोगिता रखी जाय और उसकी प्रतिद्वंद्वी मेनका भी हो तो भी प्रथम स्थान भैरवी को ही मिलना तय होता ! मैंने उसकी लिखी गज़ल को कई बार पढ़ा और अपने हृदय में उठे प्रश्नों का उत्तर ढूंढते – ढूंढते स्मृतियों में विचरण करने लगा!

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मेंहदी

एक जमाना था
जब मेंहदी की पत्तियों को
तोड़ कर
सिल पर महीन पीस कर
सीक के सहारे
हथेलियों पर उकेर दिये जाते थे
फूल पत्तियों के मध्य
पिया का नाम

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