वर्तमान समय में साहित्य और समाज का सम्बन्ध।

वर्तमान समय में साहित्य जगत में एक अभूतपूर्व क्रान्ति आई है जिसका एक कारण महिलाओं का साहित्य जगत में प्रवेश भी है। चुकीं महिलाएँ सम्बन्धों को जोड़ने में मुख्य भूमिका निभाती आईं हैं अतः साहित्य जगत में भी नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी को आपस में जोड़ने का काम कर रही हैं, जिससे आज की पीढ़ी का भी रुझान हिन्दी की तरफ बढ़ रहा है।

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मन्नत

ओपेन हार्ट सर्जरी के बाद कुछ परिजन इष्ट – मित्र मुझसे मिलने आ रहे थे तो कुछ फोन पर ही हाल चाल पूछ लेते थे लेकिन मेरी सबसे पक्की सहेली साधना का न तो काॅल आया और न ही वह खुद ही आई जिस वजह से मैं अन्दर ही अन्दर काफी दुखी रहने लगी थी और मेरी आँखें हमेशा ही साधना के लिए ही प्रतीक्षारत।

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लोक तंत्र का देखो मेला

लोक तंत्र का देखो मेला ।
आपस में ही हुआ झमेला।।

लड़ते हैं फिर भाई – भाई।
हुई देख बेचारी माई।।

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प्रेम और इज्ज़त

साहित्य की दुनिया में एक बेहद प्यारा नाम है- किरण सिंह जी का,
स्वभाव से मिलनसार, देखने में सरस्वती, मधुर लेखनी की स्वामिनी के करकमलों द्वारा उनकी तीन पुस्तकें उपहार के रूप में मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है| पुस्तक मिलते ही सोचा था कि पढ़कर जल्द ही उनपर लिखूँगी| किन्तु अति व्यस्तता के कारण लिख नहीं पायी| इसके लिए मैं किरण जी से क्षमाप्रार्थी हूँ| किन्तु कहते हैं कि विलम्ब हुआ तो एक प्रिय दिन सामने आया, पुस्तक दिवस का…तो बडी ही प्रसन्नता से लिख रही हूँ| उनकी तीन पुस्तकें, प्रीत की पाती (कविता संग्रह), अन्तः के स्वर( दोहा संग्रह) एवं प्रेम और इज्ज़त(कहानी संग्रह) मेरे पास हैं जिसमें मैं कहानी संग्रह के बारे में लिखूँगी|

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