सम्पूर्ण पुरुष

जिसमें दुनिया की
सारी खूबसूरती समाहित हैं
जो एक ऐसा दर्पण है
जिसमें देखते हुए
मुझे अपने
खूबसूरत होने का
दंभ हो जाता है
वो हैं तूम्हारे
नयन

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एकदूसरे के पूरक हैं जिंदगी और रिश्ते

यदि हम जिंदगी और रिश्तों को एक दूसरे के पूरक कहें तो यह गलत नहीं होगा क्योंकि एक बच्चा दुनिया में कदम रखते ही रिश्तों के बंधन में बंध जाता है जो उसे पहचान, संरक्षण ,प्यार तथा अपनापन का आभास कराता है!

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प्रिय तुम मेरे घर आना

स्वप्न जो रह गये अधूरे
कर देना वो सारे पूरे
प्रीत की रीत निभाना
प्रिय तुम मेरे घर आना

गिनूंगी जब मैं अन्तिम घड़ियाँ
तोड़ सभी रीति की कड़ियाँ
अपना हाथ बढ़ाना
प्रिय तुम मेरे घर आना

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