सखी पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी ,

सखी पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी ,
कन्हैया बड़ा छलिया है

बंशी बजाई के मोहे लुभावे
मधुर सुरीला राग सुनावे
खो जाऊँगी बंशी की धुन सुन
अपनी आँखों में सपने बुन
भूली अगर मैं पनिया भरन
तो मैं क्या – क्या बहाना बनाऊँगी
कन्हैया बड़ा…………….

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मैया मोरी देदो मोहे मोबाइल

मैया मोरी देदो मोहे मोबाइल

मोबाइल से बात करूंगा
तुमसे सच्ची – सच्ची
बड़ा हो गया अब तो मैं भी
उमर नहीं है कच्ची
जब तुम मुझको मिस करोगी तभी करूंगा डाइल
मैया देदो…………………

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एक चिट्ठी भाई के नाम


जैसे ही नैहर की
चौकठ पर
मैंने रखा पांव
सज – धजकर खड़ी थी भौजाई
लेकर हांथो में सजी
थाल

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सखि सावन बड़ा सताए रे

सखि सावन बड़ा सताए रे

जबसे उनसे लागि लगन
तन मन में मेरे जागि अगन
नयन करे दिन रैन प्रतीक्षा
अब दूरी सहा नहीं जाए रे
सखि सावन………………..

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