सपोर्ट

करीब दस वर्षो के बाद मेरे मोवाइल पर अचानक एक काॅल आया! आवाज़ तो कुछ जानी पहचानी सी लग रही थी फिर भी ठीक – ठीक नहीं पहचान पाई फिर उसने बताया कि मैं अमिता हूँ और अब तुम्हारे ही शहर में आ गई हूँ , मतलब मेरे पति का ट्रांसफर पटना में ही हो गया है यह सुनकर मेरा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा… हो भी क्यों न..? आखिर वह मेरी सहपाठिनी थी , उसपर भी उसने जब बताया कि मम्मी भी आई हैं तब तो और भी खुशी हुई और मिलने की लालसा और भी बढ़ने लगी थी “क्योंकि उसकी मम्मी मेरी काॅलेज की प्रिंसिपल थीं! इसलिए मैं उन्हें खाने पर आमंत्रित किये बिना नहीं रह सकी !

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टाइम है मम्मी


जॉब के बाद ऋषि पहली बार घर आ रहा था..!कुछ छःमहीने ही हुए होंगे किन्तु लग रहा था कि छः वर्षों के बाद आ रहा है ऋषि घर ! बैंगलोर से आने वाली फ्लाइट पटना में ग्यारह बजे लैंड करने वाली थी.पर मेरे पति को रात भर नींद नहीं आई ! ! कई बार ऋषि से बात करते रहे कब चलोगे.. थोड़ा जल्दी ही घर से निकलना..सड़क जाम भी हो सकती है……हाँ आई कार्ड लेना मत भूलना.. आदि आदि..और उधर से ऋषि की आवाज़ आती पापा अब मैं बच्चा नहीं रहा… आप अभी तक मुझे बच्चों की ही तरह ही ट्रीट कर रहे हैं “अभी आराम से सोइये ना आप..और पति देव मोवाइल रख कर टीवी पर न्यूज वगैरह में अपने को उलझाने लगे थे, उस समय तो उनका वश चलता तो रात भर एयरपोर्ट पर ही जाकर बैठे रहते…. उनकी इस बेचैनी को देखते हुए मैंने थोड़ा चुटकी लेते हुए ही उनसे कहा चले जाइए ना रात में ही एयरपोर्ट..फिर वे सोने की कोशिश करते ” लेकिन नींद आये तब तो सोते..इधर उधर के खटर पटर से मैं भी ठीक से नहीं सो पायी थी..!

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13 फरवरी 206

वेदना पिघल कर आँखों से छलकने को आतुर थीं.. पलकें अश्रुओं को सम्हालने में खुद को असहाय महसूस कर रही थीं…जी चाहता था कि कोई अकेला कुछ देर के लिए छोड़ तो देता कि जी भर के रो लेती.. फिर भी अभिनय कला में निपुण अधर मुस्कुराने में सफल हो रहीं थीं ..बहादुरी का खिताब जो मिला था उन्हें….! कैसे कोई समझ सकता था कि होठों को मुस्कुराने के लिए कितना परिश्रम करना पड़ रहा था…! किसी को क्या पता था कि सर्जरी से पहले सबसे हँस हँस कर मिलना और बच्चों के साथ घूमने निकलना , रेस्तरां में मनपसंद खाना खाते समय मेरे हृदय के पन्नों पर मस्तिष्क लेखनी बार बार एक पत्र लिख लिख कर फाड़ रही थी कि मेरे जाने के बाद…!

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कलियुग में भी होते हैं श्रवण कुमार

अबतक तक हम घरों की विशेष साफ सफाई दीपावली से पहले लक्ष्मी जी के स्वागतार्थ करते आये हैं किन्तु काबिले तारीफ हैं आज की पीढ़ी जो अपने पेरेंट्स के स्वागतार्थ उनके आने की सूचना पाते ही घरों की साफ सफाई में लग जाते हैं ! धन्य हैं वे माता पिता जिनकी सन्ताने उन्हें इतना मान देतीं हैं! उन धन्य माताओं में से एक मैं भी हूँ!

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