आई हैव अ प्राब्लम

तब मैं फेसबुक पर नई नई आई थी। मदर्स डे था और सभी फेसबुक फ्रेन्ड्स के बेटे – बेटियाँ बड़े ही खूबसूरत और प्यारे शब्दों में शुभकामनाएँ दे रहे थे जिसे पढ़कर मुझे खुशी तो बहुत हो रही थी लेकिन कहीं न कहीं मेरे मन के कोने में भी एक चाहत थी कि काश मेरे बेटे भी मुझे ऐसी ही कुछ शुभकामनाएँ भेजते।

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मन्नत

ओपेन हार्ट सर्जरी के बाद कुछ परिजन इष्ट – मित्र मुझसे मिलने आ रहे थे तो कुछ फोन पर ही हाल चाल पूछ लेते थे लेकिन मेरी सबसे पक्की सहेली साधना का न तो काॅल आया और न ही वह खुद ही आई जिस वजह से मैं अन्दर ही अन्दर काफी दुखी रहने लगी थी और मेरी आँखें हमेशा ही साधना के लिए ही प्रतीक्षारत।

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