बारिश की बूँदें

बारिश की बूंदों ने फिर से, जगा दिया अरमां दिल के।
कर लूँ मैं कुछ बातें मन की, चुपके से उनसे मिल के।
भीग गया सारा जग लेकिन, सूखा सा है मेरा मन।
मुश्किल लगता है अब रहना, अधरों को अपने सिल के।।