इतिहास के पन्नों पर

इतिहास के पन्नों पर शायद ,
अंकित चित्र सुनहरा होगा |
सोंच रहा है नारी मन कल
पूर्ण स्वप्न हमारा होगा |

पढ़ना जारी रखें “इतिहास के पन्नों पर”

कहीं भी कभी भी

कहीं भी, कभी भी, कितनी भी दूर रहती हूँ |
तुम हो यहीं कहीं ऐसा महसूस करती हूँ |
याद करती हूँ तुमको मगर चुपके-चुपके,
तुम्हें आये न हिचकियाँ इसलिए डरती हूँ ||

मुक्तक

अपनी चिट्ठी का अब मैं जवाब मांगूंगी |
कांटे संग ही सही पर गुलाब मांगूंगी |
प्रेम करते हैं कितना वे मुझसे सखी,
अब मैं लिखित में उनसे हिसाब मांगूंगी ||