छेड़ो मत नटखट

यमुना के तट पर, छेड़ो मत नटखट |
छोड़ दो कलाई मोहे भरना है गगरी ||

लेने दो न चैन मोहे करो न बेचैन श्याम |
विनती करूँ मैं तोरी छोड़ मोरी तगड़ी ||

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अजातशत्रु

जननायक विचारक कवि अजातशत्रु
भारत रत्न भूषित अटल बिहारी जी

राजनीति से परे सोचते थे देश हित
गाते नव गीत नीत अटल बिहारी जी

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कैसे माँगे बेटी भगवान से

सपने सजाके नैन माई बाप दिन रैन
बेटियाँ पढ़ाने भेजे बड़े अरमान से

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