गणेश चतुर्थी व्रत कथा

शिवपुराण में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मंगलमूर्ति गणेश की अवतरण-तिथि बताया गया है जबकि गणेशपुराण के मत से यह गणेशावतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। गण + पति = गणपति। संस्कृतकोशानुसार ‘गण’ अर्थात पवित्रक। ‘पति’ अर्थात स्वामी, ‘गणपति’ अर्थात पवित्रकोंके स्वामी।

पढ़ना जारी रखें “गणेश चतुर्थी व्रत कथा”

हरतालिका तीज व्रत कथा

हरतालिका तीज व्रत माता पार्वती के पुनः भगवान शिव को पति केरूप में प्राप्त करने के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार पार्वती जी ने शंकर जी को पति के रूप में हर जन्म में पाने के लिए कठोर तप किया था। वैसा ही सौभाग्य पाने के लिए सुहागिन स्त्रियां इस व्रत को करती है।

पढ़ना जारी रखें “हरतालिका तीज व्रत कथा”

शिव पार्वती के विवाह की कथा

भगवान शिव और मां पार्वती की शादी के बारे में कई पुराणों में कहा गया है. ये उस समय का सबसे भव्‍य विवाह था. इनके ब्‍याह को लेकर जो कथा सबसे अधिक प्रचलित है, हम आपको वही बताते हैं…

देवता, दानव, मानव सब पहुंचे थे शादी में

पढ़ना जारी रखें “शिव पार्वती के विवाह की कथा”

शिव पार्वती की कथा

जब सती के खुद को योगाग्रि में भस्म कर लेने का समाचार शिवजी के पास पहुंचा। तब शिवजी ने वीरभद्र को भेजा। उन्होंने वहां जाकर यज्ञ विध्वंस कर डाला और सब देवताओं को यथोचित फल दिया।

पढ़ना जारी रखें “शिव पार्वती की कथा”

राधा के प्राण त्यागते ही कृष्ण ने अपनी बांसुरी तोड़ डाली

कृष्ण ने अपनी बांसुरी की मधुर ध्वनि से अनेकों गोपियों का दिल जीता । सबसे अधिक यदि कोई उनकी बांसुरी से मोहित होता तो वो राधा थीं। परंतु राधा से कहीं अधिक स्वयं कृष्ण,राधा के दीवाने थे।

पढ़ना जारी रखें “राधा के प्राण त्यागते ही कृष्ण ने अपनी बांसुरी तोड़ डाली”