एक दूसरे को देखकर

एक दूसरे को देखकर हैं दोनो ही मगन |
दूर दूर रहकर जाने कैसे लग गई लगन |
हो ठिठुरती सर्दियाँ चाहे जलाती हो तपन |
स्विकृत किया धरा ने जो खुशी से दे दिया गगन ||

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