फुर्सत के क्षण मन अतीत में

फुर्सत के क्षण मन अतीत में विचरण करता है

भागता सा शहरी जीवन
छूटता ग्रामीण ..उपवन
वो सहजता वो सरलता
गावों का चित्रण करता है
फुर्सत के क्षण मन अतीत में विचरण करता है

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अरे रामा अंगना में

अरे रामा अंगना में बरसे बदरिया
भीजेके करे मनवा ए हरी

आइल बरखा नाचत गावत
छनन छनन जइसे घूंघरू बजावत
अरे रामा पूरब से बहे पूरवइया
भीजेके करे………………………

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आई आज शुभ की घड़ी

झरे आँखों से झर – झर लड़ी
आई आज शुभ की घड़ी

दादी चिन्ता न कर
मेरी अँजूरी दे भर
वर की तू लगा दे झड़ी
आई आज…………………

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