स्वागत है हे नव वर्ष

स्वागत है हे नव वर्ष

मन में जगी नई आशा
बुझती नहीं पिपासा
कर लो हे मन मन्थन
स्वीकार करो परिवर्तन
उतार चढ़ाव झेला है तुमने
माना बहुत किया संघर्ष
स्वागत है………………

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तुम क्यों इतने निष्ठुर हो गये..?

अभी-अभी आए हो प्रियतम
अभी जाने की बात कर गए
तुम क्यों इतने निष्ठुर हो गए.?

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भर लें भावों की गागरी

संस्कृत है जिसकी जननी
लिपि है देवनागरी
आओ हम सब मिलकर
भर लें भावों की गागरी

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मैया पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी

मैया पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी ,
तेरो लल्ला बड़ा छलिया है

बंशी बजाई के मोहे बुलावे
मधुर मधुर वह राग सुनावे
खो जाऊँ मैं बंशी की धुन सुन
दिन में ही सुन्दर सपने बुन
भूली अगर मैं पनिया भरन
तो मैं क्या – क्या बहाना बनाऊँगी
तेरो लल्ला बड़ा…………….

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आजादी का उत्सव

आजादी का उत्सव है यह पावन पर्व हमारा |
लाल किले पर लहर – लहर लहराये तिरंगा प्यारा |
हे जननी हे जन्मभूमि हम नमन तुम्हें करते हैं |
नमन तुम्हारे रणवीरों को जिसने तुम्हें संवारा |

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कैसे तुम्हें मनाऊँ मैं

तुम्हें छोड़ूँ तो कलम चले नहीं
क्या लिखूं क्या गाऊँ मैं
रूठे तुम हो तुम ही बोलो
कैसे तुम्हें मनाऊँ मैं

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