सखी पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी ,

सखी पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी ,
कन्हैया बड़ा छलिया है

बंशी बजाई के मोहे लुभावे
मधुर सुरीला राग सुनावे
खो जाऊँगी बंशी की धुन सुन
अपनी आँखों में सपने बुन
भूली अगर मैं पनिया भरन
तो मैं क्या – क्या बहाना बनाऊँगी
कन्हैया बड़ा…………….

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मैया मोरी देदो मोहे मोबाइल

मैया मोरी देदो मोहे मोबाइल

मोबाइल से बात करूंगा
तुमसे सच्ची – सच्ची
बड़ा हो गया अब तो मैं भी
उमर नहीं है कच्ची
जब तुम मुझको मिस करोगी तभी करूंगा डाइल
मैया देदो…………………

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सखि सावन बड़ा सताए रे

सखि सावन बड़ा सताए रे

जबसे उनसे लागि लगन
तन मन में मेरे जागि अगन
नयन करे दिन रैन प्रतीक्षा
अब दूरी सहा नहीं जाए रे
सखि सावन………………..

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स्वागत है हे नव वर्ष

स्वागत है हे नव वर्ष

मन में जगी नई आशा
बुझती नहीं पिपासा
कर लो हे मन मन्थन
स्वीकार करो परिवर्तन
उतार चढ़ाव झेला है तुमने
माना बहुत किया संघर्ष
स्वागत है………………

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तुम क्यों इतने निष्ठुर हो गये..?

अभी-अभी आए हो प्रियतम
अभी जाने की बात कर गए
तुम क्यों इतने निष्ठुर हो गए.?

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भर लें भावों की गागरी

संस्कृत है जिसकी जननी
लिपि है देवनागरी
आओ हम सब मिलकर
भर लें भावों की गागरी

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मैया पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी

मैया पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी ,
तेरो लल्ला बड़ा छलिया है

बंशी बजाई के मोहे बुलावे
मधुर मधुर वह राग सुनावे
खो जाऊँ मैं बंशी की धुन सुन
दिन में ही सुन्दर सपने बुन
भूली अगर मैं पनिया भरन
तो मैं क्या – क्या बहाना बनाऊँगी
तेरो लल्ला बड़ा…………….

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