मैया पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी

मैया पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी ,
तेरो लल्ला बड़ा छलिया है

बंशी बजाई के मोहे बुलावे
मधुर मधुर वह राग सुनावे
खो जाऊँ मैं बंशी की धुन सुन
दिन में ही सुन्दर सपने बुन
भूली अगर मैं पनिया भरन
तो मैं क्या – क्या बहाना बनाऊँगी
तेरो लल्ला बड़ा…………….

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आजादी का उत्सव

आजादी का उत्सव है यह पावन पर्व हमारा |
लाल किले पर लहर – लहर लहराये तिरंगा प्यारा |
हे जननी हे जन्मभूमि हम नमन तुम्हें करते हैं |
नमन तुम्हारे रणवीरों को जिसने तुम्हें संवारा |

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कैसे तुम्हें मनाऊँ मैं

तुम्हें छोड़ूँ तो कलम चले नहीं
क्या लिखूं क्या गाऊँ मैं
रूठे तुम हो तुम ही बोलो
कैसे तुम्हें मनाऊँ मैं

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आज फिर से मन मेरा

आज फिर से मन मेरा भीग जाना चाहता है

तोड़ कर उम्र का बन्धन
सावन का करें अभिनंदन
गीत गा बरखा के संग – संग
नृत्य करना चाहता है
आज फिर से मन मेरा………………….

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फुर्सत के क्षण मन अतीत में

फुर्सत के क्षण मन अतीत में विचरण करता है

भागता सा शहरी जीवन
छूटता ग्रामीण ..उपवन
वो सहजता वो सरलता
गावों का चित्रण करता है
फुर्सत के क्षण मन अतीत में विचरण करता है

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