बहुत करती हूँ मैं तुमसे प्यार,

बहुत करती हूँ मैं तुमसे प्यार,
सुनो सच कहती हूँ मैं |
लो मैं करती हूँ सच स्वीकार,
कि तुमपर ही मरती हूँ मैं |

पढ़ना जारी रखें “बहुत करती हूँ मैं तुमसे प्यार,”

सुनो सूरज कि मैं हूँ तुम्हारी किरण,

प्यार तुमसे हमेशा मैं करती रही हूँ

तुमपर जी – जी कर तुम पर ही मरती रही हूँ

हो तपन या कि चलती हो शीत लहर,

तुम उगे तो खुशी से मैं खिलती रही हूँ |

पढ़ना जारी रखें “सुनो सूरज कि मैं हूँ तुम्हारी किरण,”

मन है चंचल भर दे साधना

मन है चंचल भर दे साधना

कर जोड़ करूँ सुन ले प्रार्थना |

मैया कल्याण कर अंजूरी मेरा भर,

सत्कर्म करूँ मुझे दे प्रेरणा |

पढ़ना जारी रखें “मन है चंचल भर दे साधना”

आज सोलह श्रृंगार कर लूंगी

आज सोलह श्रृंगार कर लूंगी
मैं सितारों से माँग भर लूंगी

टूट कर तारे ज्यों ही गिरेंगे
आँचल में मैं उन्हें भर लूंगी

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श्याम सलोने आओ जी

हे श्याम सलोने आओ जी
अब तो तुम दरस दिखाओ जी

आओ मधु वन में मुरलीधर
प्रीत की बंशी बजाओ जी

पढ़ना जारी रखें “श्याम सलोने आओ जी”

लालिमा फिर छा रही है

लालिमा फिर छा रही है,
शाम ढलकर आ रही है |

चन्द्रमा से कर सगाई ,
चाँदनी इतरा रही है!

पढ़ना जारी रखें “लालिमा फिर छा रही है”