सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं।

सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं।
लिखा किस्मत का टाले से टलता नहीं।।

लग गया हो अगर इश्क का रोग तो,
लाख कर लो जतन दिल बहलता नहीं।

पढ़ना जारी रखें “सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं।”

बेटियों की माँ


न मारो बेटियों का गर्भ में भ्रुण बेटियों की माँ |
रखो उनका भी कुछ अधिकार अक्षुण्ण बेटियों की माँ |

दुनिया चाहती हैं देखना आने दो उनको भी ,
खोल दो द्वार कर लो साफ अब मन बेटियों की माँ |

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तोड़ कर सारे बंधन

मेरे भी कब्र पर बनते ताज पर ,
इश्क मेरा भी होता जांबाज गर |

तोड़ कर सारे बंधन चली आती मैं,
दी होती मुझे तुमने आवाज़ गर |

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दर्द पी लूंगी आहें भरूंगी नहीं,

दर्द पी लूंगी आहें भरूंगी नहीं,
जिंदगी से शिकायत करूंगी नहीं |

दूर रह कर भी खुश हो अगर मुझसे तुम,
लौट आने को फिर मैं कहूँगी नहीं

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