आज अचम्भित बेटियाँ

आज. अचम्भित बेटियाँ , प्रश्न रहीं हैं पूछ |
लड़के वाले क्यों भला , ऐंठ रहे हैं मूछ |

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सदियों से ही नर यहाँ

सदियों से ही नर यहाँ , बुनते आये जाल |
स्त्री ही स्त्री की शत्रु हैं . कहकर चलते चाल |

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