सदियों से ही नर यहाँ

सदियों से ही नर यहाँ , बुनते आये जाल |
स्त्री ही स्त्री की शत्रु हैं . कहकर चलते चाल |

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माँ बच्चों का प्यार

चुन – चुन दाना चोंच में , लाती बारम्बार |
देख अचम्भित मैं हुई ,माँ बच्चों का प्यार |
माँ बच्चों का प्यार , देखकर मैंने सच्चा |
सीखा गुण दो चार, लगा जो मुझको अच्छा |
कहे किरण कर यत्न ,सोचती क्यों घबराना |
गौरैया हर बार , खिलाती चुन – चुन दाना ||