कहतीं हैं चित्कार कर

कहतीं हैं चित्कार कर , सूनी – सूनी गोद ।
एक – एक की तुम यहाँ , शिघ्र कब्र दो खोद।

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शिघ्र उगो तुम चन्द्रमा

शिघ्र उगो तुम चन्द्रमा, आज करो मत रार |
दूंगी मैं तुमको अरघ, कर सोलह श्रृंगार |

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