कल्पना के राजकुमार

मधु अपने वीरान जिंदगी में फिर से खुशियों की आहट महसूस कर रही थी, रोम – रोम प्रफुल्लित हो रहा था, मन में फिर से जीने की लालसा जाग उठी थी, मानो उसका मृत देह जो प्रखर के दुनिया से जाने के बाद से जिंदा लाश बन गयी थी फिर से उसमें किसी ने प्राण फूंक दिये हो ! महीनों बाद मधु खुद को आइने में देख रही थी! आह कितनी बदल गयी हूँ मैं सोचकर दो बूँद अश्रु छलक पड़े उसके गालों पर और वह अपने

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भैरवी

आज यूँ ही समाचार पत्र पर साहित्य पेज को पलटा तो एक जानी पहचानी सी खूबसूरत तस्वीर पर मेरी नज़रें ठहर गईं ! फिर नाम मैंने नाम देखा तो भैरवी ! बला की खूबसूरत तो थी ही अब तो भैरवी और भी खूबसूरत लग रही थी इस तस्वीर में ! देखकर तो ऐसा लग रहा था कि यदि सौन्दर्य की प्रतियोगिता रखी जाय और उसकी प्रतिद्वंद्वी मेनका भी हो तो भी प्रथम स्थान भैरवी को ही मिलना तय होता ! मैंने उसकी लिखी गज़ल को कई बार पढ़ा और अपने हृदय में उठे प्रश्नों का उत्तर ढूंढते – ढूंढते स्मृतियों में विचरण करने लगा!

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मंगलसूत्र

जो दीप्ति हमेशा सुहाग चिन्हों का मजाक उड़ाने में जरा भी संकोच नहीं करती थी आज अचानक करवा चौथ के दिन छत पर चाँद को अर्घ्य देते हुए अपनी सहेली कामिनी के सोलह श्रृंगार से सजे हुए रूप लावण्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी ! जब कामिनी हाथ में चलनी लेकर अपने चाँद को निहार रही थी तो तो सच में कामिनी के मुखड़े की दमक के सामने चाँद का भी चमक फीका पड़ गया था ! जब कामिनी का पति अर्नव अपनी पत्नी कामिनी को प्यार से पानी पिलाकर व्रत खोल रहा था तो दीप्ति कामिनी के सौन्दर्य का जादुई रहस्य समझने की कोशिश कर रही थी कि आखिर यह चमत्कार उसके सोलह श्रृंगार की वजह से हुआ या फिर उसके पति के प्यार की वजह से !दीप्ति बार – बार कल्पना के आइना मे निहारती हुई खुद और कामिनी के सौन्दर्य की तुलना करते हुए अतीत में चली गई !

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आई लव यू टू 

अंश क्लास टेस्ट के पेपर पर अपने पापा की साइन करवा कर अपनी क्लास टीचर ज्योति को जैसे ही दिखाया तो ज्योति बार – बार उलट – पुलट कर उस साइन को देखने लगी क्योंकि साइन और नाम दोनो ही कुछ जाना – पहचाना सा लगा उसे !

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जीवन का सत्य

अरे – अरे यह मैं कहाँ आ गई? अपनी हमउम्र श्याम वर्णा तराशे हुए नैन नक्श वाली साध्वी को अपनी खाट के बगल में काठ की कुर्सी पर बैठे हुए देखकर मीना कुछ घबराई हुई सी उससे पूछ बैठी। साध्वी वृक्ष के तना के समान अपनी खुरदुरी हथेली उसके सर पर फेरती हुई बोली बहन घबराओ नहीं तुम सुरक्षित स्थान पर आ गई हो।

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भगवती देवी 

हाँ भगवती देवी बिल्कुल सटीक नाम है उनका क्यों कि कहाँ बोलतीं हैं भगवती देवियाँ , कहाँ सोचतीं हैं भगवती, कहाँ रोती हैं , देवियाँ! उन्हें तो ज़रा सा अक्षत, फूल, माला, फल, मिठाई चढ़ा दो , खा लो , और फिर बाँट दो उन्हें तो प्रसन्न होकर आशिर्वाद देना ही है क्यों कि वह देवी जो ठहरीं ! अपना धर्म तो निभाना ही होगा उन्हें न? साथ ही अपने नाम तथा यश कीर्ति का खयाल भी रखना होगा !

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ज्वैलरी

भतीजे की शादी में आने के लिए भैया – भाभी ने ज्यों ही न्योता भेजा मेरे तो सपनों के पंख लग गये! इन्हीं मांगलिक कार्यक्रमों में तो सभी रिश्ते – नातेदारों से मिलना हो पाता है! मौसी, चाची, बुआ, बहनें, सखियाँ, सहेलियाँ सभी एक साथ, एक जगह साथ में गाना – बजाना सोच – सोच कर मन रोमांचित हुआ जा रहा था ! साथ ही क्या पहनना है क्या गिफ्ट करना है

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