ओल्ड फैशन

स्वछंदता ले रही थी
लज्जा का
साक्षत्कार
सिमटी, सकुचाई सी लज्जा
नयन झुकाये
धीरे से अपने दोनो हाथ जोड़कर बोली
नमस्ते

पढ़ना जारी रखें “ओल्ड फैशन”

गृह लक्ष्मी हूँ

गृह लक्ष्मी हूँ
गृह स्वामिनी हूँ
साम्राज्ञी हूँ और
अपने सुखी संसार में
खुश भी हूँ
फिर भी
असंतुष्ट हूँ स्वयं से

पढ़ना जारी रखें “गृह लक्ष्मी हूँ”

स्त्री विमर्श

विषय है स्त्री विमर्श
ढूढ रही हूँ शब्द इमानदारी से
कि लिखूं स्त्रियों की असहनीय पीड़ा
दमन , कुण्ठा
कि जी भर कोसूं पुरुषों को
कि जिन पुरूषों को जानती हूँ उन्हें ही
कुछ कहूँ भला बुरा
पर

पढ़ना जारी रखें “स्त्री विमर्श”

जाने से पहले

जाना तो
है ही
कभी न कभी
हमें भी
किसी दिन
इसलिये तो
जी चाहता है
कुछ कह लें कुछ सुन लें
जाने से पहले

पढ़ना जारी रखें “जाने से पहले”

पानी की तरह होती हैं स्त्रियाँ

पानी की तरह होती हैं स्त्रियाँ
समझा होगा पूर्वजों ने
कि जिस बर्तन में डालो
वैसा ही आकार ले ले लेंगी
तभी तो

पढ़ना जारी रखें “पानी की तरह होती हैं स्त्रियाँ”

सम्पूर्ण पुरुष

जिसमें दुनिया की
सारी खूबसूरती समाहित हैं
जो एक ऐसा दर्पण है
जिसमें देखते हुए
मुझे अपने
खूबसूरत होने का
दंभ हो जाता है
वह हैं तूम्हारी
आँखें

पढ़ना जारी रखें “सम्पूर्ण पुरुष”