सम्पूर्ण पुरुष

जिसमें दुनिया की
सारी खूबसूरती समाहित हैं
जो एक ऐसा दर्पण है
जिसमें देखते हुए
मुझे अपने
खूबसूरत होने का
दंभ हो जाता है
वो हैं तूम्हारे
नयन

पढ़ना जारी रखें “सम्पूर्ण पुरुष”

प्रिय तुम मेरे घर आना

स्वप्न जो रह गये अधूरे
कर देना वो सारे पूरे
प्रीत की रीत निभाना
प्रिय तुम मेरे घर आना

गिनूंगी जब मैं अन्तिम घड़ियाँ
तोड़ सभी रीति की कड़ियाँ
अपना हाथ बढ़ाना
प्रिय तुम मेरे घर आना

पढ़ना जारी रखें “प्रिय तुम मेरे घर आना”

नभ भी घुट घुट जी रहा है

बात मन की क्यों बताऊँ
पीर अपनी क्यों जताऊँ
अश्रु अपना पी रहा है
नभ भी घुट – घुट जी रहा है

पढ़ना जारी रखें “नभ भी घुट घुट जी रहा है”

उलझन

एक शहर में सावन बरसे दूसरे में है तपन
किस शहर में मैं रहूँ उलझन में है मन

एक शहर में कामना तो दूसरे में है समर्पण
एक शहर में ज्योति है तो दूसरे में जीवन

पढ़ना जारी रखें “उलझन”

मित्रता

ये अम्बर भी न
सूर्य देव की तपिश के सहारे
बार-बार धरती मैया की
अग्नि परीक्षा लेता है
बार-बार धरती मैया
परीक्षा देने को हो जाती है
विवश
या शायद
सहर्ष

पढ़ना जारी रखें “मित्रता”