मेंहदी

एक जमाना था
जब मेंहदी की पत्तियों को
तोड़ कर
सिल पर महीन पीस कर
सीक के सहारे
हथेलियों पर उकेर दिये जाते थे
फूल पत्तियों के मध्य
पिया का नाम

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एक चिट्ठी भाई के नाम


जैसे ही नैहर की
चौकठ पर
मैंने रखा पांव
सज – धजकर खड़ी थी भौजाई
लेकर हांथो में सजी
थाल

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आसमान चाहिए

मैं समझती हूँ
तुम्हारे भावनाओं को
तब से
जब से तुमने पूर्ण विश्वास के साथ
मुझे सौप दिये थे
अपना घर ,परिवार
और मैं

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चूड़ियाँ

कितनी मधुर होती हैं
चूड़ियों की खनकार
जिनके मधुर संगीत
मंत्रमुग्ध कर देती हैं
साजन को
खींच लेती हैं उनके
मन की डोर

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ओल्ड फैशन

स्वछंदता ले रही थी
लज्जा का
साक्षत्कार
सिमटी, सकुचाई सी लज्जा
नयन झुकाये
धीरे से अपने दोनो हाथ जोड़कर बोली
नमस्ते

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