अति सर्वत्र वर्जयते

दुनिया जहान के सभी बच्चे फले , फूले, खुश रहें, अपने लक्ष्य को प्राप्त करें, उनके सपने साकार हों यही शुभकामना है |
हमने देखी है अक्सर ही स्त्रियों के समस्याओं को लेकर परिचर्चा होती रहती है , आये दिन स्त्री विमर्श देखने सुनने तथा पढ़ने को मिल जाता है लेकिन बच्चे जाने अनजाने ही सही अपने अभिभावकों द्वारा सताये जाते हैं इस तरफ़ कम ही लोगों को ध्यान जा पाता है! प्रायः सभी के दिमाग में यह बात बैठा हुआ है कि माता – पिता तो बच्चों के सबसे शुभचिंतक होते हैं इसलिए वे जो भी करते हैं अपने बच्चों की भलाई के लिए ही करते हैं।

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नवरात्रि

हिन्दू धर्म में व्रत तीज त्योहार और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। हर वर्ष चलने वाले इन उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों को हिन्दू धर्म का प्राण माना जाता है इसीलिये अधिकांश लोग इन व्रत और त्योहारों को बेहद श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं।

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वर्तमान समय में साहित्य और समाज का सम्बन्ध।

वर्तमान समय में साहित्य जगत में एक अभूतपूर्व क्रान्ति आई है जिसका एक कारण महिलाओं का साहित्य जगत में प्रवेश भी है। चुकीं महिलाएँ सम्बन्धों को जोड़ने में मुख्य भूमिका निभाती आईं हैं अतः साहित्य जगत में भी नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी को आपस में जोड़ने का काम कर रही हैं, जिससे आज की पीढ़ी का भी रुझान हिन्दी की तरफ बढ़ रहा है।

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भारतीय_नारी_की_दशा

यह आलेख आज से चौंतीस वर्ष पूर्व मैंने लिखी थी ।

नारी की दशा हमारे देश में आदिकाल से ही सोचनीय रही है। पुरुष ने तो हमेशा ही नारी की उपेक्षा की है।
नारी के गौरव और प्रतिष्ठा के सबसे बड़े हिमायती मनु ने यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता कहकर भी नारी को धर्म शास्त्र सुनने का अधिकार नहीं दिया। महाकवि तुलसीदास ने भी

ढोल, गँवार, शुद्र, पशु, नारी।
ये सब तारन के अधिकारी

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गलतियों से ज्यादा गलत फहमियों और अधिक अपेक्षाओं की वजह से टूटते हैं रिश्ते।

मनुष्य जब किसी से भी भावनात्मक रूप से जुड़ता है तो उनके मध्य एक खूबसूरत रिश्ता कायम हो जाता है और उन रिश्तों के बीच उम्मीदें स्वतः ही जुड़ जातीं हैं फिर जब वह व्यक्ति विशेष उनके उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है तो हृदय बेवजह ही आहत हो जाता है। चुकीं ऐसे रिश्ते दिल से जुड़े होते हैं और दिल तो स्वयं ही पागल और कमजोर होता है तो वह इस आघात को सहन नहीं कर पाता है ऐसे में दिल टूटने के साथ ही दिल के रिश्ते भी टूटने लगते हैं। ऐसी स्थिति में आवश्यकता होती है सूझबूझ से काम लेने की और ऐसे समय में सबसे बड़ी सलाहकार होती है अपनी मति।
कई बार तो ऐसा होता है कि कोई आहत होता है और दूसरे को इल्म तक नहीं होता क्यों कि कभी-कभी परिस्थितियाँ भी ऐसी बन जाती हैं कि एक दूसरे के मध्य गलत फहमियाँ पैदा हो जाती हैं ।

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लोहरी

लोहड़ी का त्यौहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पौष माह की आखिरी रात में मनाया जाता है।
यह त्योहार एक तरह से संग्रदियों के जाने और बसंत के मौसम के आने की आहट है। इस दिन अग्नि में फसलों का अंश भी समर्पित किया जाता है। कहा जाता है कि सूर्य और अग्नि जो ऊर्जा के बड़े स्रोत है उन्हें समर्पित है। लोहड़ी की रात सबसे ठंडी मानी जाती है। यह त्योहार मुख्यतः नई फसल की कटाई के मौके पर मनाया जाता है और रात को लोहड़ी जलाकर सभी रिश्तेदार और परिवार वाले पूजा करते हैं। इस मौके पर सभी एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं।

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#एक #चिट्ठी #साहित्यकार #भाइयों #एवम् #बहनों #के #नाम!

प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में भावनाएँ मचलती रहतीं हैं और जैसे ही व्यक्ति शब्दों के माध्यम से उन्हें अभिव्यक्त करने की कला सीख लेता है तो उन्हीं भावनाओं को शब्दों में ढालकर गीत, गज़ल और कविता का रूप दे देता है । और जब सृजन खूबसूरत हो जाता है तो उस सृजन कर्ता को जो तुष्टि का आभास होता है उसे शब्दों में बयाँ करना थोड़ा कठिन जरूर है।

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