दायरे

जिस प्रकार महिलाएँ किसी की बेटी बहन पत्नी तथा माँ हैं उसी प्रकार पुरुष भी किसी के बेटे भाई पति तथा पिता हैं इसलिए यह कहना न्यायसंगत नहीं होगा कि महिलायें सही हैं और पुरुष गलत ! पूरी सृष्टि ही पुरुष तथा प्रकृति के समान योग से चलती है इसलिए दोनों की सहभागिता को देखते हुए दोनों ही अपने आप में विशेष हैं तथा सम्मान के हकदार हैं!
महिलाएँ आधुनिक हों या रुढ़िवादी हरेक की कुछ अपनी पसंद नापसंद, रुचि अभिरुचि बंदिशें, दायरे तथा स्वयं से किये गये कुछ वादे होते हैं इसलिए वे अपने खुद के बनाये गये दायरे में ही खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं !

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अतिथि तुम कब………

आजकल अधिकांश लोगों के द्वारा यह कहते सुना जाता है कि आजकल लोग एकाकी होते जा रहे हैं , सामाजिकता की कमी होती जा रही है, एक पहले का जमाना था जब अतिथि को देव समझा जाता था लेकिन आजकल तो बोझ लगने लगे हैं अतिथि आदि आदि..!

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सम्बोधन

अपने परिजनों के अलावा भी हम जहाँ रहते हैं वहाँ रहने वाले लोगों के साथ भी कुछ सम्बन्ध जुड़ जाता है और उन सम्बन्धों की पुष्टि हेतु औपचारिक तौर पर ही सही सम्बोधन की आवश्यकता होती है! सम्बोधन गैरों को भी अपना बनाने का जज्बा रखता है इसलिए बहुत सोच समझ कर विशेष रूप से अपने उम्र का खयाल रखकर ही किसी के साथ सम्बन्ध जोड़ कर सम्बोधित करना चाहिए कि कहीं सम्बोधन सम्बन्धों में मिठास की बजाय खटास और कड़वाहट न घोल दे! सम्बन्ध जोड़ते समय अपना तथा सामने वाले के उम्र का खयाल तो रखें ही साथ ही इस बात का जरूर ध्यान रखें कि सामने वाला व्यक्ति आपके सम्बोधन को सहर्ष स्वीकार कर ले! सोच – समझकर कहे गये सम्बोधन जहाँ होठों पर खूबसूरत मुस्कान बिखेरते हैं वहीं बेवकूफी भरे जोड़े गये सम्बन्ध आपको हास्यास्पद बनाते हैं या फिर ऐसा भी हो सकता है कि सम्बन्ध जुड़ते – जुड़ते रह जायें!

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बहुरूपिये बदनाम कर रहे हैं संत परम्परा को

कभी-कभी मनुष्य की परिस्थितियाँ इतनी विपरीत हो जाती हैं कि आदमी का दिमाग काम करना बंद कर देता है और वह खूद को असहाय सा महसूस करने लगता है ! ऐसे में उसे कुछ नहीं सूझता ! निराशा और हताशा के कारण उसका मन मस्तिष्क नकारात्मक उर्जा से भर जाता है! ऐसे में यदि किसी के द्वारा भी उसे कहीं छोटी सी भी उम्मीद की किरण नज़र आती है तो वह उसे ईश्वर का भेजा हुआ दूत या फिर ईश्वर ही मान बैठता है ! ऐसी ही परिस्थितियों का फायदा उठाया करते हैं साधु का चोला पहने ठग और उनके चेले ! वे मनुष्य की मनोदशा को अच्छी तरह से पढ़ लेते हैं और ऐसे लोगों को अपनी मायाजाल में फांसने में कामयाब हो जाते हैं ! इसके अतिरिक्त अधिक लोभी तथा अति महत्वाकांक्षी व्यक्ति भी अति शिघ्र अप्राप्य को प्राप्त कर लेने की लालसा में भी बहुरूपिये बाबाओं के चक्कर में फंस जाते हैं! हमारी पुरातन काल से चली आ रही संत समाज तथा गुरु परम्परा को बदनाम कर रहे हैं ये बहुरूपिये !

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नवरात्रि

हिन्दू धर्म में व्रत तीज त्योहार और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। हर वर्ष चलने वाले इन उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों को हिन्दू धर्म का प्राण माना जाता है इसीलिये अधिकांश लोग इन व्रत और त्योहारों को बेहद श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं।

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स्त्री विधाता की सबसे खूबसूरत सृजन है

प्रकृति और पुरुष विधाता के दो विशिष्ट सृजन में से स्त्री सबसे खूबसूरत सृजन है!
भारतीय संस्कृति में स्त्री को पुरुषों की अपेक्षा अधिक सम्मान दिया गया है ऐसा आदि-ग्रंथों में पढ़ने को मिलता है – यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते रमंते तत्र देवता | अर्थात जहाँ नारियों की पूजा की जाती है वहां देवता निवास करते है !
पूरे विश्व में आठ मार्च को महिलाओं के सम्मान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है |
सर्व प्रथम महिला दिवस अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वाहन पर 28 फरवरी 1909 को मनाया गया था | अमेरिका में उस समय महिला दिवस का उत्सव मनाए जाने के पीछे महिलाओं को वोट देने का अधिकार हासिल करना था क्योंकि तत्कालीन परिस्थियों में अधिकांश देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था |

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होली क्यों मनाया जाता है

भारत वर्ष उत्सवों का त्योहार है जहाँ हरेक पर्व को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाकर जीवन की उदासीनता को दूर कर नवीनता का संचार किया जाता है जिससे जीवन खूबसूरत लगने लगता है! जहाँ दीपावली जीवन में जगमगाहट लेकर आती है वहीं होली हमारे बेरंग जीवन में रंग भरकर मन में नव उमंग भर देती है!

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