कहतीं हैं चित्कार कर

कहतीं हैं चित्कार कर , सूनी – सूनी गोद ।
एक – एक की तुम यहाँ , शिघ्र कब्र दो खोद।

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बहुत करती हूँ मैं तुमसे प्यार,

बहुत करती हूँ मैं तुमसे प्यार,
सुनो सच कहती हूँ मैं |
लो मैं करती हूँ सच स्वीकार,
कि तुमपर ही मरती हूँ मैं |

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सुनो सूरज कि मैं हूँ तुम्हारी किरण,

प्यार तुमसे हमेशा मैं करती रही हूँ

तुमपर जी – जी कर तुम पर ही मरती रही हूँ

हो तपन या कि चलती हो शीत लहर,

तुम उगे तो खुशी से मैं खिलती रही हूँ |

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मन है चंचल भर दे साधना

मन है चंचल भर दे साधना

कर जोड़ करूँ सुन ले प्रार्थना |

मैया कल्याण कर अंजूरी मेरा भर,

सत्कर्म करूँ मुझे दे प्रेरणा |

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पुस्तक समीक्षा – प्रेम और इज्जत

मानव मन की सबसे कोमल भावनाओं में से एक है प्रेम | देवता दानव पशु पक्षी कौन है जिसने इसे महसूस ना किया हो | कहा तो ये भी जाता है कि मनुष्य में देवत्व के गुण भी प्रेम के कारण ही उत्पन्न होते हैं | परन्तु विडंबना ये है कि जिस प्रेम की महिमा का बखान करते शास्त्र थकते नहीं वही प्रेम स्त्री के लिए हमेशा वर्जित फल रहा है | उसे प्रेम करने की स्वतंत्रता नहीं है |

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मकर संक्रांति

मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रान्ति पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है , सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं. एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है. वैसे तो सूर्य संक्रांति 12 हैं, लेकिन इनमें से चार संक्रांति महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, कर्क, तुला, मकर संक्रांति हैं.

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