उम्र हो चाहे कोई भी

उम्र हो चाहे कोई भी प्यार करना लाजिमी है |

प्यार से ही प्यार में तकरार करना लाजिमी है।।

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गोलू मोलू बबलू डबलू

गोलू मोलू बबलू डबलू खेल रहे थे बाॅल
आयीं आंटी बीच में तो उड़ गई उनकी शाॅल

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अति सर्वत्र वर्जयते

दुनिया जहान के सभी बच्चे फले , फूले, खुश रहें, अपने लक्ष्य को प्राप्त करें, उनके सपने साकार हों यही शुभकामना है |
हमने देखी है अक्सर ही स्त्रियों के समस्याओं को लेकर परिचर्चा होती रहती है , आये दिन स्त्री विमर्श देखने सुनने तथा पढ़ने को मिल जाता है लेकिन बच्चे जाने अनजाने ही सही अपने अभिभावकों द्वारा सताये जाते हैं इस तरफ़ कम ही लोगों को ध्यान जा पाता है! प्रायः सभी के दिमाग में यह बात बैठा हुआ है कि माता – पिता तो बच्चों के सबसे शुभचिंतक होते हैं इसलिए वे जो भी करते हैं अपने बच्चों की भलाई के लिए ही करते हैं।

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कल्पना के राजकुमार

मधु अपने वीरान जिंदगी में फिर से खुशियों की आहट महसूस कर रही थी, रोम – रोम प्रफुल्लित हो रहा था, मन में फिर से जीने की लालसा जाग उठी थी, मानो उसका मृत देह जो प्रखर के दुनिया से जाने के बाद से जिंदा लाश बन गयी थी फिर से उसमें किसी ने प्राण फूंक दिये हो ! महीनों बाद मधु खुद को आइने में देख रही थी! आह कितनी बदल गयी हूँ मैं सोचकर दो बूँद अश्रु छलक पड़े उसके गालों पर और वह अपने

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आओ दीया जलायें


आओ दीया जलायें
विश्वास की बाती में
घृत प्रेम का मिलायें
खुशियों की ज्योति में हम
दुख का तिमिर मिटायें
आओ दीया जलायें

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