उम्मीद

संध्या अपने पति मुकेश से बोली आज मुम्बई से मेरी एक फ़ेसबुक फ़्रेण्ड ज्योति आ रही है !
मुकेश थोड़ा रूखे मन से ही ठीक है लेकिन तुम उन लोगों को जानती हो ?
संध्या -अरे हाँ बाबा मैं कोई बेवक़ूफ़ थोड़े हूँ कि बिना जाने समझे किसी को भी घर में बुला लूँगी उसके पति मुंबई में आई पी एस आॅफिसर है और वे खुद भी लेक्चरर है!

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फुर्सत के क्षण मन अतीत में

फुर्सत के क्षण मन अतीत में विचरण करता है

भागता सा शहरी जीवन
छूटता ग्रामीण ..उपवन
वो सहजता वो सरलता
गावों का चित्रण करता है
फुर्सत के क्षण मन अतीत में विचरण करता है

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सदियों से ही नर यहाँ

सदियों से ही नर यहाँ , बुनते आये जाल |
स्त्री ही स्त्री की शत्रु हैं . कहकर चलते चाल |

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अरे रामा अंगना में

अरे रामा अंगना में बरसे बदरिया
भीजेके करे मनवा ए हरी

आइल बरखा नाचत गावत
छनन छनन जइसे घूंघरू बजावत
अरे रामा पूरब से बहे पूरवइया
भीजेके करे………………………

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