सुहानी भोर

लगीं संवरने रश्मियाँ, हुई सुहानी भोर।

खिली – खिली सी दामिनी , आई लिये अंजोर ।

आई लिये अंजोर , छुप गये चाँद सितारे।
दर्पण नदिया देख, सुन्दरी रूप निहारे।
अंधकार को भेद , लगा फिर सूर्य चमकने।
सुन्दरता से चूर , रश्मियाँ लगीं संवरने।।
जीवन में सुर ताल लय, गूँज उठे चहुँ ओर
चहक – चहक मृदुभाषिणी , करे चिरैया शोर ।
करे चिरैया शोर , सुहानी भोर हुई है।
छलके अमिय पराग , धरा लरकोर हुई है ।
त्याग किरण आलस्य , उठी चपला सी क्षण में।
कर ली दृढ़ संकल्प , बढ़ी आगे जीवन में ।।

सुहानी भोर&rdquo पर एक विचार;

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