शीघ्र उगो तुम चन्द्रमा

शीघ्र उगो तुम चन्द्रमा, आज करो मत रार |
दूंगी मैं तुमको अरघ, कर सोलह श्रृंगार |

कर सोलह श्रृंगार, हाथ में लिये चलनिया |
देखेगी फिर चाँद, चाँदनी बनी सजनिया |
कहे किरण हे चाँद , कहाँ तुम आज हुए गुम |
बात हठी की मान , गगन में शिघ्र उगो तुम ।।

खनके कर में चूड़ियाँ, छनके पायल पाँव।
चमक – चमक कर बिंदिया, ढूढ रही है ठाँव।
ढूढ रही है ठाँव, चाँदनी तुझको इत – उत ।
धर कर रूप अनूप , सुन्दरी सजनी अद्भुत।
अपने सजना संग , किरण आई बन ठन के ।
सिन्दूर सोहे भाल , चूड़ियाँ कर में खनके।।

लगी चहकने चाँदनी , अपने चंदा संग।
सकुचाई सी यामिनी, बदल रही है रंग।
बदल रही है रंग, श्यामली सुन्दर बाला।
चाँद सितारे मस्त, पी रहे मधु का प्याला।
देख सुन्दरी रूप , स्वतः ही लगी बहकने।
तभी हो गयी भोर , किरण भी लगी चहकने । ।

शीघ्र उगो तुम चन्द्रमा&rdquo पर एक विचार;

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