हिन्दी

जननी है संस्कृत स्वयं, उर्दू अनुजा मान ।
देवनागरी लिपि किरण , हिन्दी की पहचान ।।


मीठी – मीठी मदभरी , सुन्दर, सुघड़ , सुजान।
हिन्दी भाषा सुन्दरी , अपनी है अभिमान ।।

संगम भाषा की यही, हिन्दी तीर्थ प्रयाग।
ढूंढो इसमें डूबकर , सुन्दर जीवन राग।।

गीत लिखी, कविता लिखी, लिखी गीतिका गीत।
यूँ ही लिख – लिख हो गया, प्रिय हिन्दी से प्रीत।।

एक राग स्वर एक हो , लय भी अपनी एक |
हिन्दी की जय बोल कर , काम करें हम नेक ||

हिन्दी गरिमा राष्ट्र की, हिन्दी है पहचान |
हिन्दी में ही बोलिये , तभी बढ़ेगा शान ||

दिल में मेरे रह गया , इतना सा अरमान |
अब तो हिन्दी को मिले, उसके हक का मान ||

आदत से अपनी मनुज , अब तो आ जा बाज।
अंग्रेजीयत त्याग कर , कर हिन्दी में काज।।

तोड़ गुलामी बेड़ियाँ, कब से हो आजाद।
फिर करते तुम क्यों नहीं, हिन्दी की फरियाद ।।

हम सब हिन्दी हैं हमें , हिन्दी से है प्यार।
चलो लगायें जोर से, हिन्दी की जयकार।।

5 विचार “हिन्दी&rdquo पर;

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