जय श्री राम

पंचर होकर सायकिल ,हुई लक्ष्य से दूर।
पुनः कमल खिलने लगा, हाथ हुआ मजबूर ।

हाथ हुआ मजबूर , हो गया हाथी घायल।
फूट गयी ललटेन, जीत जनता की कायल।

किरण राम का नाम, एक ऐसा है मंतर।
बिगड़ी भी बन जाय , भाग्य चाहे हो पंचर।।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s