दूल्हा माँगे वोट

बाराती सज – धज चले , दूल्हे हैं बेहाल ।
दूल्हन कुर्सी हाथ में , लिये खड़ी वरमाल।

लिये खड़ी वरमाल, सोचती अपने मन में।
किसकी होगी जीत, स्वयंवर के इस क्षण में।

किसको चुन लूँ आज, किरण मैं जीवनसाथी।
आये देखो द्वार , संग वर के बाराती।।

छली न कपटी चोर हो, और न मति का मूढ़।
सुन्दर, सहज सुयोग वर , लाओ बाबा ढूंढ।

लाओ बाबा ढूंढ, तभी मैं ब्याह करूँगी।
मानो मेरी बात, नहीं तो पुनः लड़ूंगी ।

किरण कुड़ी सम हाय, कुर्सियाँ ऐसे डपटी।
दूल्हा माँगे वोट , कहे हम छली न कपटी।।

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