प्रार्थना

श्रद्धा का सितारा टांककर चुनरी बनाई हूँ |
सुमन ले भावनाओं का मैं पूजा थाल सजाई हूँ |

पखारे पाँव मेरे अश्रु माँ मैं क्या करूँ अर्पण ,
दयामयि माँ तुम्हारे दर मैं खाली हाथ आई हूँ |

दया कर मुझ भिक्षुणी पर मैया देदो मुझको वर।
कि हो हर कामना पूरी मेरी मैं जो भी चाही हूँ।

मति है चंचला मेरी, विकारों से भरा है मन |
भरो माँ साधना मुझमे , मैं मूर्खा तेरी जाई हूँ |

निमन्त्रण देने आई हूँ, मेरे घर भी पधारो माँ ,
कि मैं माँ लीप डेहरी सुन्दरम् पुष्प बिछाई हूँ

जभी आता है जो जी में, वही मैं भाव लिखती हूँ ,
बेसुरी हूँ भले मैं माँ मगर, तुमको ही गाई हूँ ||

5 विचार “प्रार्थना&rdquo पर;

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