पिचकारी ले तोप की

पिचकारी ले तोप की , भर बारूदी रंग।
होगा सीमापार अब , होली में हुड़दंग ।।

होली में हुड़दंग , मचेगा देखो अबकी।
उड़ जायेगी नींद , शत्रु खेमे में सबकी।
किरण खून का खेल , पड़ेगा अरि पर भारी।
बढ़े समर में वीर, तोप की ले पिचकारी।।

करके सीमापार अब , दे दो उचित जवाब।
एक – एक को भून कर, कर लो पूर्ण हिसाब।
कर लो पूर्ण हिसाब , पाक पर करो चढ़ाई ।
करो छावनी ध्वस्त, शत्रुओं की अब भाई।
किरण बना दो तोप , कलम को तुम भी तड़के।
शब्दों का बारूद, भरो तुम भी कुछ करके।।

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