मन है चंचल भर दे साधना

मन है चंचल भर दे साधना

कर जोड़ करूँ सुन ले प्रार्थना |

मैया कल्याण कर अंजूरी मेरा भर,

सत्कर्म करूँ मुझे दे प्रेरणा |

कंठ में स्वर दे माँ मुझे वर दे

मति मूर्खा में माँ जगा दे चेतना |

चले लेखनी हो निडर हो प्रखर,

उक्ति ऐसी दो दूर हटे वेदना |

तम दूर करें ज्ञान के दीप से,

मन को प्रज्वलित कर करें अर्चना |

करती है किरण माँ तेरी वंदना,

कभी तो पूर्ण कर दे मनोकामना ||

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