गलतियों से ज्यादा गलत फहमियों और अधिक अपेक्षाओं की वजह से टूटते हैं रिश्ते।

मनुष्य जब किसी से भी भावनात्मक रूप से जुड़ता है तो उनके मध्य एक खूबसूरत रिश्ता कायम हो जाता है और उन रिश्तों के बीच उम्मीदें स्वतः ही जुड़ जातीं हैं फिर जब वह व्यक्ति विशेष उनके उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है तो हृदय बेवजह ही आहत हो जाता है। चुकीं ऐसे रिश्ते दिल से जुड़े होते हैं और दिल तो स्वयं ही पागल और कमजोर होता है तो वह इस आघात को सहन नहीं कर पाता है ऐसे में दिल टूटने के साथ ही दिल के रिश्ते भी टूटने लगते हैं। ऐसी स्थिति में आवश्यकता होती है सूझबूझ से काम लेने की और ऐसे समय में सबसे बड़ी सलाहकार होती है अपनी मति।
कई बार तो ऐसा होता है कि कोई आहत होता है और दूसरे को इल्म तक नहीं होता क्यों कि कभी-कभी परिस्थितियाँ भी ऐसी बन जाती हैं कि एक दूसरे के मध्य गलत फहमियाँ पैदा हो जाती हैं ।

ऐसे ही हुआ कुछ सीमा और स्वाति के साथ।
दोनों बहुत अच्छी फेसबुक सहेलियाँ थीं। सीमा के पुस्तक का विमोचन दिल्ली पुस्तक मेले में होने वाला था। चूंकि सीमा दिल्ली में रहती थी इसलिये स्वाति से मिलने के लिए बहुत उत्साहित थी और सीमा का निमंत्रण भी था तो वह सिर्फ स्वाति से मिलने के लिए विश्व पुस्तक मेला दिल्ली पहुंच गई लेकिन पहुंचते – पहुंचते काफी लेट हो गई और जब पहुंची तो पुस्तक विमोचन हो चुका था। फिर स्वाति को लगा कि चलो यह तो मैं ही लेट हुई न इसमें सीमा की क्या गलती है। सीमा ने भी अपना आटोग्राफ देकर स्वाति को अपनी पुस्तक भेट की तो स्वाति को अच्छा लगा। तभी स्वाति के साथ कोई आये थे ( जिसे सीमा ने समझा कि उनके कोई परिजन ही होंगे) ने किसी स्टाल पर चलने का आग्रह किया तो सीमा ने जाने के लिए अनाकानी करना चाही क्योंकि वह काफी थक चुकी थी और उसकी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही थी लेकिन स्वाति के आग्रह पर मन बनाकर उसके साथ हो ली। दूसरे स्टाल पर जाने के बाद सीमा के कुछ और परीचित मिल गये जिसके साथ फोटो शोटो ली गई। लेकिन सीमा की तबियत अंदर से खराब लग रही थी वह इधर-उधर देखी लेकिन स्वाति दिखाई नहीं दी तो वह सोची स्वाति किसी काम में व्यस्त होगी इसलिए वह पुस्तक मेले से चली आई। इधर सीमा के बिना बोले आ जाने के बाद स्वाति को लगा कि सीमा उसे नजरअंदाज करके चली गई जबकि वह उसी से स्पेशली मिलने गई थी इस बात से स्वाति काफी दुखी थी और सीमा के प्रति उसके मन में दुर्भावना भर गई लेकिन जब सीमा का काॅल आया और उसने स्वाति से माफी माँगते हुए अपनी तबियत खराब की सूचना दी तो फिर स्वाति की गलतफहमी दूर हुई और उनमें फिर से पहले की ही तरह सद्भावना कायम हो गई।

इसी तरह की कहानी कुछ वरुण और मेघा की है। मेघा का जन्म दिन था और इस अवसर पर उसकी सभी सहेलियों और दोस्तों की शुभकामनाएँ आईं लेकिन मेघा तो वरुण की शुभकामनाओं की प्रतीक्षा कर रही थी लेकिन नहीं आयीं क्यों कि वरुण कम्पिटीशन की तैयारी में इतना मशगूल था कि उस समय उसे दूसरा कुछ याद ही नहीं रहा । इधर मेघा को लगा कि वरुण के दिल में मेरे लिए जगह ही नहीं है। दूसरी तरफ़ शिखर मेघा की हर छोटी-छोटी भावनाओं तथा खुशियों का खयाल रखने लगा । दोनों की नजदीकियाँ बढ़ते – बढ़ते शादी तक पहुंच गई और वरुण हाथ मलता रह गया।

कहने का तात्पर्य यह है कि रिश्ते बनाना तो बहुत आसान है लेकिन चलाना और निभाना उतना ही मुश्किल इसलिए रिश्तों की खूबसूरती बनी रहे इसके लिए कोशिश हमेशा करनी चाहिए कि हमारे किसी भी व्यवहार से रिश्ते आहत न हों और न ही किसी गलतफहमी के शिकार हों ।

2 विचार “गलतियों से ज्यादा गलत फहमियों और अधिक अपेक्षाओं की वजह से टूटते हैं रिश्ते।&rdquo पर;

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