बेटियों की माँ


न मारो बेटियों का गर्भ में भ्रुण बेटियों की माँ |
रखो उनका भी कुछ अधिकार अक्षुण्ण बेटियों की माँ |

दुनिया चाहती हैं देखना आने दो उनको भी ,
खोल दो द्वार कर लो साफ अब मन बेटियों की माँ |


न होंगी बेटियाँ तो तुम कहाँ से लाओगी बहुएँ,
करो तुम संतुलित संसार को बन बेटियों की माँ |

घर हो या कि हो बाहर बेटियाँ हो रहीं अव्वल.
मनाओ जश्न उनके जन्म के क्षण बेटियों की माँ |

जीती जागती इंसान हैं सुत के समान वो भी,

वस्तुओं सम करो कन्या न दान बेटियों की माँ

पढ़ाओ बेटियों को भी किरण की प्रार्थना है यह ,
बनाना है उन्हें काबिल करो प्रण बेटियों की माँ |

2 विचार “बेटियों की माँ&rdquo पर;

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