कि सखी साजन????

गीत, गज़ल, कविता में आये |
मिलने को हरदम अकुलाये |

जुड़ कर दिल से कहता सस्वर |

कि सखी साजन ????

न सखी अक्षर |

बहुत मुझे है उससे प्यार |
बिन उसके सूना श्रृंगार |

होठ लगे तो हिल जाय डिस्टिक |

कि सखी साजन????
न सखि लिपस्टिक |

निश दिन मेरा राग अलापे |
छेड़ूँ मैं तो थर – थर काँपे |

कभी हर्ष कभी वह दे पीड़ा |

कि सखी साजन ?????
न सखी वीणा |

देख उसे मैं स्वयं लुभाऊँ |
उसको पाकर मैं इतराऊँ |

बहुत पड़ा पर सौदा महंगा |

कि सखी साजन????

न सखी लहंगा |

लट उलझाकर चूमे गाल |
मैं शरमाकर हो गई लाल |

लटक – झटक लगाये ठुमका |

कि सखी साजन ???
न सखी झुमका |

देवे कान पकड़कर झटके |
चूमे गाल हमेशा सट के |

देत बने न उसको गाली |

कि सखी साजन ????

न सखी बाली |

गला पकड़ कर उर में अटके |
आँखों में सबके वह खटके |

किन्तु मुझे है उससे प्यार |

कि सखी साजन ????
न सखी हार |

वाणी में वह मिश्री घोल |
हरदम बोले मीठे बोल |

मेरा नाम जप जगता सोता |
कि सखी साजन ????

न सखी तोता |

झूठ – मूठ जतलाता प्यार |
नहीं कभी करता इन्कार |

माँग सभी स्विकृत कर लेता |

कि सखी साजन????

न सखी नेता |

2 विचार “कि सखी साजन????&rdquo पर;

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