ज्वैलरी

भतीजे की शादी में आने के लिए भैया – भाभी ने ज्यों ही न्योता भेजा मेरे तो सपनों के पंख लग गये! इन्हीं मांगलिक कार्यक्रमों में तो सभी रिश्ते – नातेदारों से मिलना हो पाता है! मौसी, चाची, बुआ, बहनें, सखियाँ, सहेलियाँ सभी एक साथ, एक जगह साथ में गाना – बजाना सोच – सोच कर मन रोमांचित हुआ जा रहा था ! साथ ही क्या पहनना है क्या गिफ्ट करना है

अधिकांश समय इन्हीं उहापोह में बीता जा रहा था फिर दौर शुरू हुआ शापिंग का! गिफ्ट करने वाले कपड़े, गहने तो आसानी से खरीद लिया मैंने लेकिन खुद क्या पहनना है इसके लिए पूरा बाजार छान मारा फिर भी कोई साड़ी पसंद ही नहीं आ रही थी क्योंकि सभी पहले कपड़े खरीद लेते हैं उसके बाद मैचिंग ज्वैलरी मिलाते हैं लेकिन मैं अपनी लाॅकर में रखी ज्वैलरी के हिसाब से साड़ी खरीद रही थी! खूब छानबीन करने के बाद दो चार साड़ियाँ पसंद आईं जिसका अलग – अलग रस्मों के लिए मन ही मन में मैं अलग – अलग चित्र बना रही थी उसके बाद मैचिंग चूड़ियाँ, मैचिंग बिंदी सौन्दर्य प्रसाधन खरीदने में भी काफी मसक्कत करनी पड़ी! मुझे तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि मुझे क्या हो गया था कि जो मैं घंटे दो घंटे में लाखों का शाॅपिंग कर लेती थी और आज…… कुछ झल्लाहट भी हो रही थी अपनेआप पर!

खैर किसी भी तरह खरीदारी का कार्य समाप्त हुआ उसके बाद पैकिंग का कार्य शुरू…. सच में यह शादी व्याह भी न हम सभी को पागल बनाकर छोड़ देता है… एक अलग ही नशा सा छा जाता है… पहनने – ओढ़ने , खाने – खिलाने , सजने – संवरने तथा दिखावे की प्रक्रिया चरम पर होती है तभी तो अंत में मैं पहुंच गई लाॅकर से ज्वैलरी निकालने के लिए बैंक! एक मन हो रहा था कि आजकल तो आर्टिफिशियल ज्वैलरी ही चलन में है तो क्यों न मैं भी बाजार से वही ले लूँ लेकिन फिर सोचा आखिर यह ज्वैलरी किस दिन – रात के लिए है जो मैं अपने भतीजे की शादी में ही न पहनूँ सो मैं हर साड़ियों के मैचिंग ज्वैलरी बैंक के लाॅकर से निकाल लाई और बड़े जतन से रख ली!
बुआ के यहाँ पहुँचते ही भाई – भाभी का स्वागत – सत्कार से मन भावविभोर हुआ जा रहा था! भैया भाभी ने तो सभी को कोई दिक्कत नहीं हो इसलिए सभी रिस्तेदारों के लिए होटल में रूम बुक कर रखा था लेकिन इतना अपनापन और प्यार पाकर मन होटल जाने का नहीं किया इसलिए मैं भीड़ भाड़ के बावजूद भी घर में ही रहने की सोची क्यों कि घर में हरेक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना साथ ही रात – रात भर जागकर बतियाना यह सब कहाँ सम्भव हो पाता है होटलों में और मैं तो पूरी शादी इन्जॉय करना चाहती थी!
मैं शादी विवाह के हर कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही थी गाते बजाते बोलते बतियाते कैसे समय बीत गया पता ही नहीं चला! बारात में भी खूब जमकर औरों के साथ-साथ मैं भी नाची तब यह भी नहीं याद रहा कि मैं हर्ट पेशेंट भी हूँ और मेरी साँस भी नहीं फूल रही थी ऐसे में पतिदेव ताना मारने से भी नहीं बाज आये कि अब तुम्हारी बीमारी कहाँ चली गई? लेकिन मैं इन बातों को नजरअंदाज कर पूरी मस्ती कर रही थी!
शादी विवाह के बाद दुलहन भी घर आ गई दूल्हन के आने के बाद दुल्हन उतराई, कोहबर, आदि रस्मों के बाद थकान के बाद नींद आ गई और हम कब कहाँ सो गये कुछ पता ही नहीं चला जब नींद खुली तो सभी बहुभोज में जाने के लिये तैयार थे और एक मैं ही नहीं तैयार थी! जल्दी – जल्दी से मैं भी जाने के लिये तैयार होने लगी साड़ी कपड़े पहनने के बाद जब ज्वैलरी पहनने की बारी आई तो मेरी ज्वैलरी बैग मिल ही नहीं रही थी.. मैं सारा बैग छान मारी लेकिन कहीं भी अता पता नहीं मिला! फिर मैं औरों से भी पूछ रही थी लेकिन कोई भी मेरी बात पर ध्यान ही नहीं दे रहा था क्योंकि सभी को बहुभोज में जाने की जल्दी थी और आधे से अधिक लोग तो जा भी चुके थे! मैं और भी परेशान होने लगी क्यों कि मैं रोज पहनने वाली ज्वैलरी भी उसी बैग में डाल दी थी ! एक तो गहने चोरी का दुख ऊपर से नाक – कान, गला खाली कैसे पार्टी में जाऊँ सोच – सोच कर परेशान हुए जा रही थी जब कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो मैं जोर – जोर से रोने लगी फिर भी मेरे पास कोई नहीं आ रहा था तो मैं और जोर से रोने लगी और अपनेआप को कोसने लगी कि क्या जरूरत थी इतने भीड़ भाड़ में गहने लाने की जब आर्टिफिशियल ज्वैलरी से भी काम चल जाता! रो रोकर मेरा बुरा हाल हुए जा रहा था, धड़कने बढ़ गईं थीं, सभी मुझे छोड़कर बहुभोज में जा चुके थे! तभी मुझे लगा कि कोई मुझे जोर – जोर से हिला रहा है आँख खुली तो पतिदेव थे बोले हाथ छाती पर से हटा लो छाती पर हाथ जाने से रात में डरावने सपने आते हैं! और मेरी जान में जान आई!

4 विचार “ज्वैलरी&rdquo पर;

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