शिघ्र उगो तुम चन्द्रमा

शिघ्र उगो तुम चन्द्रमा, आज करो मत रार |
दूंगी मैं तुमको अरघ, कर सोलह श्रृंगार |

कर सोलह श्रृंगार, हाथ में लिये चलनिया |
देखेगी फिर चाँद, चाँदनी बनी सजनिया |

कहे किरण हे चाँद , कहाँ तुम आज हुए गुम |
बात हठी की मान , गगन में शिघ्र उगो तुम ||

5 विचार “शिघ्र उगो तुम चन्द्रमा&rdquo पर;

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