दर्द पी लूंगी आहें भरूंगी नहीं,

दर्द पी लूंगी आहें भरूंगी नहीं,
जिंदगी से शिकायत करूंगी नहीं |

दूर रह कर भी खुश हो अगर मुझसे तुम,
लौट आने को फिर मैं कहूँगी नहीं

समझदारों का है ये शहर मान ली ,
मूर्खा ही मैं सही समझूंगी नहीं |

हूँ मैं बीमार मिलने की तुमसे है जिद ,
बिन देखे तुम्हें मैं मरूंगी नहीं |

इश्क है रोग मैंने भी माना है सच ,
भावनाओं में अब मैं बहूंगी नहीं |

बात सीधी कहूंगी मैं सच मान लो,
बेवजह झूठ को मैं मथूंगी नहीं ¦

उगो सूरज तभी तो खिलेगी किरण,
कैसे कह दूँ तपन मैं सहूंगी नहीं |

6 विचार “दर्द पी लूंगी आहें भरूंगी नहीं,&rdquo पर;

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