आजादी का उत्सव

आजादी का उत्सव है यह पावन पर्व हमारा |
लाल किले पर लहर – लहर लहराये तिरंगा प्यारा |
हे जननी हे जन्मभूमि हम नमन तुम्हें करते हैं |
नमन तुम्हारे रणवीरों को जिसने तुम्हें संवारा |

देकर जीवन की आहुति ले आये आजादी |
लौह पुरुष थे वे जिनका सीना भी था फौलादी |
समशीरों की चमक देख जिनसे दुश्मन था हारा |
नमन तुम्हारे रणवीरों को जिसने तुम्हें संवारा |

तन मन धन से हम भी करेंगे रक्षा मातु तुम्हारी |
पदचिन्हों पर चलकर उनके पड़ेंगे अरि पर भारी |
हँसते – हँसते जिसने फाँसी का फंदा स्वीकारा |

नमन तुम्हारे रणवीरों को जिसने तुम्हें संवारा |

खाते हैं अब कसम तुम्हारी जीयेंगे हम शान से |
आँख दिखायेगा अरि तो वह पहुँचेगा श्मशान में |
जय हिन्द की बोली से जग गूँज उठेगा सारा |
नमन तुम्हारे रणवीरों को जिसने तुम्हें संवारा |

4 विचार “आजादी का उत्सव&rdquo पर;

  1. जय हिन्द की बोली से जग गूँज उठेगा सारा |
    नमन तुम्हारे रणवीरों को जिसने तुम्हें संवारा |….देश भक्ति से ओतप्रोत बहुत सुंदर कविता किरण जी , जय हिन्द

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