मित्रता

तप्त हृदय को , सरस स्नेह से ,
जो सहला दे , मित्र वही है।

रूखे मन को , सराबोर कर,
जो नहला दे , मित्र वही है।

प्रिय वियोग ,संतप्त चित्त को ,
जो बहला दे , मित्र वही है।

अश्रु बूँद की , एक झलक से ,
जो दहला दे , मित्र वही है।

मैथिलीशरण गुप्त जी की इन चंद पंक्तियों में मित्रता को बहुत ही खूबसूरती से परिभाषित की गई है !

सच ही तो है कितना खूबसूरत लगता है हमें अपने मित्रों का सानिध्य जो हमें हमेशा ही सम्बल प्रदान करता है, जिससे हम अपने विचारों का विनिमय बहुत ही सहजता से कर लेते हैं , जिससे अपना दुख – सुख बांटने में ज़रा भी झिझक नहीं होती ! बल्कि अपने मित्र से अपना दुख बांटकर हल्का महसूस करते क्यों कि मित्रता मानव हृदय का उत्कृष्ट और पवित्र प्रेम भाव है……. जिसकी डोर विश्वास के सूत्र में बंधी होती है .. मित्र के हृदय वीणा के तार मित्र से जुड़े होते हैं ..शायद यही वजह है कि स्पंदन मात्र से बिना कहे और सुने मित्र की मनोदशा को मित्र समझ लेता है…और मित्र की भावनाओं का खयाल रखते हुए मित्र को खुश रखने का यथासंभव प्रयास करता है….. और सुख बांटकर और भी अधिक सुख की अनुभूति करते हैं!
मित्र तो हमारे दिलों में रहते हैं इसलिए मित्रता दिवस की तो आवश्यकता ही नहीं है किन्तु इसके पीछे एक कहानी है जो मित्रता दिवस की महत्ता को सार्थक करता है |
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान लोग और देश बिखर गये थे! तब लोगों को आपस में जोड़ने के लिए मित्रता की भावना को जगाने की आवश्यकता पड़ी! तब यूएस काँग्रेस ( संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की संसद ) ने अगस्त के पहले सन्डे को फ्रेंडशिप डे मनाने का निश्चय किया! इस तरह कई देश आपस में जुड़ने लगे तब से मित्रता दिवस मनाने की परंपरा चल पड़ी!

वैदिक काल से ही मित्रता के विशिष्ट मानक दृष्टिगत होते आये है| जहाँ रामायण काल में राम और निषादराज, सुग्रीव और हनुमान की मित्रता प्रसिद्ध है वहीँ महाभारत काल में कृष्ण- अर्जुन, कृष्ण- द्रौपदी और दुर्योधन-कर्ण की मित्रता नवीन प्रतिमान गढती है| कृष्ण और सुदामा की मित्रता की तो मिसाल दी जाती है जहाँ अमीर और गरीब के बीच की दीवारों को तोड़कर मित्रता निभाई गई थी |
वैसे तो जीवन में मित्रता बहुतों से होती है लेकिन कुछ के साथ अच्छी बनती है जिन्हें सच्चे मित्र की संज्ञा दी जा सकती है ! तुलसीदासजी ने भी लिखा है “धीरज,धर्म, मित्र अरु नारी ;आपद काल परखिये चारी| अर्थात जो विपत्ति में सहायता करे वही सच्चा मित्र है|

वैसे तो कहा जता है कि मित्रता में जाति, धर्म, उम्र तथा स्तर नहीं देखा जाता है किन्तु सामान्यतः देखा जाता है कि मित्रता समान उम्र , समान स्तर , तथा समान रूचि के लोगों में अधिक गहरी होती है क्योंकि स्थितियाँ करीब – करीब समान होती है ऐसे में एक दूसरे के भावनाओं को समझने में अधिक आसानी होती है ! इसी आधार पर समान लिंग की मित्रता में भी मनुष्य स्वयं को अधिक सहज महसूस करता है तथा एक दूसरे की मनःस्थिति को समझना ज्यादा आसान होता है क्योंकि उनकी अधिकांश परिस्थितियाँ समान होतीं हैं फिर भी विपरीत लिंग की मित्रता की महत्ता तथा खूबसूरती को नकारा नहीं जा सकता है मिसाल के तौर पर कृष्ण तथा द्रौपदी की मित्रता को लिया जा सकता है !

कृष्ण और द्रौपदी की मित्रता में ध्यान देने योग्य बातें यह है कि कृष्ण ने द्रौपदी के पुकार को दूर से भी सुन ली और आकर लाज बचाई थी! वहीं द्रौपदी को कृष्ण पर इतना विश्वास था कि महाभारत जैसे युद्ध का दंश झेलने के बावजूद भी कभी भी कृष्ण पर संदेह नहीं किया ! जब कि कृष्ण सामर्थ्यवान थे!

पहले महिलाओं को इतनी आजादी नहीं थी यही कारण था कि महिला पुरुष की मित्रता मात्र रिश्तों में बंध कर रह गई थी! जैसे देवर – भाभी जीजा _साली आदि.! पर आज स्त्रियों और पुरुषों के मध्य मित्रता का दायरा बढ़ता जा रहा है! स्कूल, काॅलेज, आफिस में महिलाओं की बराबर की सहभागिता भी महिला तथा पुरुष को मित्रता के सूत्र में पिरो रहा है !

मित्रता का दायरा बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है सोशल मीडिया ने! जहाँ अनजान लोगों के मध्य भी लेखन और टिप्पणियों के माध्यम से भावनाएँ इस कदर जुड़ जाती हैं जैसे लगता है एक-दूसरे से जन्मों से परिचित हों…!

बहुत से लोगों का मत है कि आभासी दुनिया की मित्रता सिर्फ लाइक कमेंट पर टिकी होती है यह सत्य भी है,किन्तु यदि हम सकारात्मक दृष्टिकोण अपनायेंगे तो पायेंगे कि यह लाइक और कमेंट ही हमें आपस में जोड़तें हैं ! क्यों कि पोस्ट तथा लाइक्स और कमेंट्स ही व्यक्ति के व्यक्तित्व को उजागर करते हैं जिनमें हम वैचारिक समानता तथा शब्दों में अपनत्व को महसूस करते हैं और मित्रता कर बैठते हैं !
पर यह भी सही है कि आभासी दुनिया की मित्रता में भी धरातल की मित्रता की ही भाँति सुमित्र तथा कुमित्र दोनों ही पाये जाते हैं तो यह हम पर निर्भर करता है कि हम कैसे मित्रों का चयन करते हैं क्योंकि प्रायः मनुष्य अपने ही तरह के व्यक्तित्व से मित्रता करना चाहता है या फिर अपने तरह के लोगों को ही अपनी तरफ आकर्षित करता है!

यदि देखा जाये तो हमारे जीवन की हर सफलता तथा असफलताओं के पीछे प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से हमारे परिवार के सदस्यों के साथ – साथ हमारे मित्रों की भी भागीदारी होती है इसलिये मित्रता का हाथ सोच समझ कर ही बढ़ाना चाहिए !

कर्ण और दुर्योधन की मित्रता से सबक लिया जा सकता है! कर्ण दुर्योधन की मित्रता के बोझ तले इतना दबा हुआ था कि मित्रता धर्म के सामने उसे अपना दूसरा धर्म याद नहीं रहा और धर्म का पक्षधर होते हुए भी उसे अपने मित्र दुर्योधन के लिए अधर्म का साथ देना पड़ा परिणामस्वरूप सामर्थ्यवान होते हुए भी को पराजय का सामना करना पड़ा !

पर चूंकि मित्रता भी दिल का रिश्ता होता है तो दिल दिमाग की सुनता कहाँ है इसलिये सीधा-सादा, भोला – भाला दिल कभी-कभी बेवकूफ़ी भी कर जाता है और फँस जाता है कुमित्रों के चक्कर में! इस लिये हमें चाहिये कि अपने दिल को समझाएँ कि वह मति की सलाह लेकर ही कोई निर्णय ले!

बहुत किस्मत वालों को ही अच्छी और सच्ची मित्रता प्राप्त होती है ! मित्रता की सरलता और सहजता का वास्तविक अनुमान वे ही लगा सकते हैं जिन्हें वास्तव में मित्रता हुई हो !

10 विचार “मित्रता&rdquo पर;

  1. पोस्ट तथा लाइक्स और कमेंट्स ही व्यक्ति के व्यक्तित्व को उजागर करते हैं जिनमें हम वैचारिक समानता तथा शब्दों में अपनत्व को महसूस करते हैं और मित्रता कर बैठते हैं !…. बहुत सुंदर लिखा किरण जी , मैं अपने को भाग्यशाली समझती हूँ जो मुझे आप जैसे मित्र मिली

    पसंद करें

  2. मित्र दिवस का लेख ये पढ़ा है मन से आज ।।
    देवी तुम हो शारदे मन कहता है आज ।।
    हाथ बढाया सुनो करो मित्रता आज ।।
    हाथ मिला कर राखियो आज हमारी लाज।।
    (आदरणिया अनुजा किरण सिँह जी आपका पूरा लेख पढा हृदय मे वीणा के तारो सा स्पंदन हो उठा ।।
    आदरणिया सुनिता बिंदाल जो कि फैसबुक मित्र है उन्होने भी ऐक बार यही बोला कि फैसबुक की दुनिया केवल आभासी दुनिया है तब मैने बोला आदरणिया अनुजा आप मो.नम्बर लेलो बात करो सच्चे अपनत्व से
    तब वे बोली नही सब आप जैसे नही होतो है ।। आदरणिया जी मेरी भी ये आकांक्षा रहती है कि मित्रो से चाहे वे पुरुष हो या महिला ऐक बार तो कम से कम बात होनी ही चाहिये ।। आप को भी अगर आपकी अनुमती होगी तो नम्बर दुंगा ।।)
    सादर वन्दे आपका शुभेच्छु भीकम जांगिड़
    कवि “भयंकर”

    पसंद करें

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s