माँगा अगर दहेज तो

माँगा अगर दहेज तो , कर लो प्रथम विचार |
बेच दिया यदि पुत्र को , फिर कैसा अधिकार |

फिर कैसा अधिकार , तुम्हारा होगा सुत पर |
इसीलिये पाषाण , स्वयं रख लो सीने पर |
कहे किरण कुछ नीति, समझ कर फिर समझाना |
आखिर में यह भीख , सोचना क्यों कर माँगा ||

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