टूटा नभ का धैर्य फिर

टूटा नभ का धैर्य फिर , गया अंततः हार |
नयन बदरिया से छलक ,रिमझिम पड़े फुहार |

रिमझिम पड़े फुहार , भेद कुछ खोल रहीं हैं |
रोया है आकाश , धरा से बोल रहीं हैं |
कहे किरण फिर नेह ,धरा ने आखिर समझा |
ओढ़ लिया श्रृंगार , हृदय ज्यों टूटा नभ का ||

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