उम्मीद

संध्या अपने पति मुकेश से बोली आज मुम्बई से मेरी एक फ़ेसबुक फ़्रेण्ड ज्योति आ रही है !
मुकेश थोड़ा रूखे मन से ही ठीक है लेकिन तुम उन लोगों को जानती हो ?
संध्या -अरे हाँ बाबा मैं कोई बेवक़ूफ़ थोड़े हूँ कि बिना जाने समझे किसी को भी घर में बुला लूँगी उसके पति मुंबई में आई पी एस आॅफिसर है और वे खुद भी लेक्चरर है!

मुकेश थोड़ा चिढ़ कर तुम्हें पता है ऐसे ही सोशल मीडिया पर चपरासी भी अपनेआप को कलेक्टर कह देता है अभी तुम लोग घर में रहती हो न इसलिये दुनियादारी का अभी पता नहीं है !
इसबात पर संध्या थोड़ा चिढ़ी लेकिन सोची कौन बहस करके मूड बिगाड़ने जाये इसलिये चुप ही रहना उचित समझी और किचेन में नास्ता की तैययारी करने लगी !
बीच-बीच में रास्ता पूछने के लिये संध्या का कितनी ही बार कॉल आता रहा तो संध्या उसे समझा देती और फिर बड़े ही तन्मयता से अपने काम में लग जाती साथ ही अपनी कामवाली सहायिका को भी समझा देती थी कि कब -कब ,क्या -क्या ,कैसे -कैसे सर्व करना है !
दरवाज़े की घंटी बजी तो संध्या ने दरवाज़ा खोला आगन्तुक को पहचानने में संध्या को ज़्यादा देर नहीं हुई क्यों कि ज्योति सोशल मीडिया पर यदा -कदा कुछ तस्वीरें डाल दिया करती थी ! घर में प्रवेश करते ही दोनों ऐसे मिलीं जैसे बचपन की बिछड़ी सहेलियाँ मिल रही हों! दोनों के पति भी आपस में हाथ मिलाने की औपचारिकता करके सोफ़े पर अपना स्थान ग्रहण कर बैठ गये !
चाय नास्ते के साथ बातों का सिलसिला शुरू हुआ ! संध्या ज्योति के पति जयंत से काफ़ी प्रभावित हुई बल्कि आज उसे ज्योति के कहे गये एक -एक बात पर विश्वास हो रहा था जिसे सुनकर वह मन ही मन सोचा करती थी कि अन्य स्त्रियों की तरह ये भी अपने पति की प्रशंसा बढ़ाचढ़ाकर करती है !
फ़ोन पर जब कभी दोनों की बातें होती थी तो ज्योति अक्सर संध्या से कहा करती थी कि मेरे पति सच में परमेश्वर हैं बल्कि परमेश्वर से भी बढ़कर हैं ! उनके इतना ख़याल तो मेरे माँ – बाप भी मेरा नहीं रख पाये थे , मैं ज़रा भी कोई काम करने लगती हूँ तो इनकी जान निकलने लगती है और सबसे बड़ी बात कि मेरे पति को दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत औरत मैं ही लगती हूँ ! उसके इस बात पर संध्या को हँसी भी आती थी लेकिन हमेशा संध्या संयत रहकर ज्योति के हाँ में हाँ मिला लिया करती थी लेकिन मिलने के बाद तो उसे भी लगने लगा कि सच में ईश्वर किसी -किसी की क़िस्मत पूरे मनोयोग से लिखते हैं तभी तो साधारण सी दिखने वाली ज्योति को इतने प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनि व्यक्ति पति के रूप में तो मिले ही साथ ही इतना ज़्यादा पत्नी को सम्मान ……कुछ देर के लिये तो संध्या को ज्योति के क़िस्मत से ईर्ष्या भी होने लगी थी तभी ज्योति ने कहा कि जब मैं यहाँ आ रही थी तो मेरी एक रिलेटिव पूछ रही थी कि कहाँ जाना है तो इन्होंने ( अपने पति की तरफ़ इशारा करके )कहा कि एक अपनी बचपन की फ़्रेंड के यहाँ जा रही है यह सुनकर संध्या को काफ़ी हँसी आ गई क्यों कि कारण उसे भी पता था कि फेसबुकिया दोस्ती के बारे में आम लोगों की क्या धारणा रहती है आम लोगों कि क्या बल्कि उसे तो अपने ही घर में कितना कुछ सुनना और समझाना पड़ता था !
संध्या जयंत की तरफ़ मुख़ातिब होकर बोली- आपको बहुत – बहुत धन्यवाद कि आप बिना जाने समझे अपनी पत्नी के फेसबुकिया फ़्रेंड के यहाँ आने के लिये अपना बहुमूल्य समय निकाले वर्ना बहुत से लोग तो ……………..
तभी जयंत ने अपनी बात को कुछ अधिक ही ज़ोर देते हुए कहा अरे संध्या जी ज्योति मेरी पत्नी हैं और इन्होंने मुझे आपके यहाँ चलने को कहा , और जब इन्होंने मुझसे कहा तो कुछ सोच समझ कर ही कहा होगा… फिर मुझे तो आना ही था !
जयंत के इतना कहते ही संध्या अपने पति की तरफ़ देखने लगी इस उम्मीद से कि कुछ तो सीख इन्हें भी तो मिली होगी !

11 विचार “उम्मीद&rdquo पर;

  1. एक उम्मीद जगाती कहानी किरण जी …. केवल एक स्त्री के लिए नहीं हर स्त्री के लिए जो यह उम्मीद करती है कि उसका पति उसके मित्रों के ऊपर वैसे ही विश्वास करे जैसे वो करती रही है |

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  2. Mamta kashyap

    मुझे तो संध्या के पति भी अपनी जगह ठीक लग रहे…..संध्या के पति को पूरा भरोसा है संध्या पर वे आजकल की कुछ परिस्थियाँ की वजह से सावधान रहने बोल रहे

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