सदियों से ही नर यहाँ

सदियों से ही नर यहाँ , बुनते आये जाल |
स्त्री ही स्त्री की शत्रु हैं . कहकर चलते चाल |

कहकर चलते चाल, जरा तुम समझो इसको |
डाल रखे हैं फूट , दोष बोलो दूँ किसको |
कहे किरण हे नार , करो कुछ विषय समझ के |
धो दो सभी कलंक , लगा है जो सदियों से |

2 विचार “सदियों से ही नर यहाँ&rdquo पर;

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