छूटे से नहीं छूटे

बंध गई मन से मन की डोर टूटे से नहीं टूटे |

भले रूठी हो किस्मत पर ये फूटे से नहीं फूटे |


न जाने कब तुम्हारा रंग मुझपर चढ गया साजन,

मलूँ सौ या हजारों बार छूटे से नहीं छूटे ||

4 विचार “छूटे से नहीं छूटे&rdquo पर;

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