लगी आदत

लगी आदत मुझे तेरी ,
तुझे मैं छोड़ दूँ कैसे |
किये हैं कसमें वादे जो,
उन्हें मैं तोड़ दूँ कैसे |

दिलों जां से तुझे मैंने,
स्वयं स्वीकार किया है,
तुम्हीं बोलो तेरी राहों से,
मैं पग मोड़ लूँ कैसे ||

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s