टूट गई तंद्रा

टूट गई तंद्रा जो पग थाप से ,
हृदय का है नाता मेरा आपसे |

रुकी जो थीं सांसें फिर चलने लगीं,
सजन आपके नाम के जाप से |

बर्फ सा था जमा दिल पिघलने लगा,
आपके गर्म इन सांसों के ताप से |

डर रही हूँ किसी को भनक न लगे,
अधरों पे आपकी यूँ अधर छाप से |

आ गई यामिनी फिर गई दामिनी,
राग छेड़ी प्रणय का प्रेमालाप से |

चाँद जाने लगा सूर्य आने लगा,
खिल गई फिर किरण भोर में धाप से |

4 विचार “टूट गई तंद्रा&rdquo पर;

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