प्रीत की पाती

आदरणीया सादर प्रणाम.

आपकी दोनो पुस्तकें पढ़ा . आपकी सभी रचनायें मधुर सरल बोधगम्य . हैं आपकी भाषा बिल्कुल सहजगम्य है । एसा बिल्कुल नही लगता कि आप नई कवियित्री हैं ।कम शब्दों मे बड़े ही सरल भाषा मे बहुत बड़ा भाव कह देती हैं । आपने जो अनुभव किया वही लिखा।”मिले सुकून दिल को मै इसलिए लिखती हूं . कभी समझोगे मुझे मै इसलिए लिखती हूँ .” आपके ह्रदय का अथाह प्रेम आपकी सभी रचनाओं मे उछालें मारता है । किन्तु प्रेम की पवित्रता भी आपकी सात नही कई जन्मो तक की स्थाई सम्पत्ति है।

नारी सशक्तिकरण नारी विमर्श को भी आपने बहुत अच्छे ढंग से गति दिया है लेकिन भारतीय समाज की सुसंस्कृति को आपने कहीं भी विस्मृत नहीँ किया। आपने जो कहा कि नये कवियों को कोई पढ़ता नही पर मै समझता हूँ की आपकी हर रचना पठनीय आनंद दायक और संदेश परक है ।भक्ति आध्यात्मिकता के भाव भी उत्कृष्ट हैं प्रीत की पाती की अपनी बात आपने बहुत ही अच्छा सुरुचिपूर्ण लिखा है आपमे सहजता सरलता स्नेह प्रेम निरभिमानिता जैसे गुण हैं जो आपकी हर रचना मे विद्यमान हैं । आपने लिखा अक्षर अक्षर शब्द शब्द मे रस की गगरी छलक रही है । बिल्कुल सही है ।आपकी पुस्तकें जहाँ भी रहेंगी विशिष्ट स्थान रहेगा. आपके दोहे तो सभी कंठस्थ करने लायक हैं । आपने अपने अमूल्य भावों के संग्रह की अमूल्य रचना देकर जो स्नेह दिया है मै हमेशा ऋणी रहूँगा । मेरी बातों को यथार्थ माना जाय प्रसंशा नही . आप हमेशा लिखती रहें लिखती रहें। हिन्दी साहित्य को आपसे अभी बहुत अपेक्षा है । कतिपय कारणो से आपको आभार कृतज्ञता समीक्षा देने विलम्ब हुआ पर आपको भूला नहीं भूलूंगा भी नहीँ । स्नेह बनाये रखेंगी । मै आपको साहित्य के शिखर मे देखूंगा एक दिन . ईश्वर आपको सफल करे सदा सुखी रखे आयुष्मान करे यशस्वी करे. मेरी वाणी मे यदि कहीं पर त्रुटि हुई हो तो क्षमायाची हूँ । सादर नमन। हरि ॐ ।

रामलखन मिश्र – प्राचार्य
शा. हाईस्कूल कर्री . पोस्ट दियापीपर . जिला शहडोल . म.प्र.

प्रीत की पाती&rdquo पर एक विचार;

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