आज उजड़े चमन में

मेरे उजड़े चमन में बहार आ गई ,
कविताएँ मेरे संग इतरा गई |

सोचा भी न था कि वे मिलेंगे कभी,
देखकर उनको मैं थोड़ा घबरा गई |

धड़कने मेरे दिल की धड़कने लगीं,
झुकीं पलकें मेरी और मैं शरमा गई |

छू लिये वे मुझे मैं सिहर सी गई,
मीठी बातें मुझे उनकी बहला गईं |

कर दिया मैंने खुद को समर्पित उन्हें,
बरसी खुशियाँ मुझको नहला गई |

6 विचार “आज उजड़े चमन में&rdquo पर;

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