तुम्ही प्रेम पूजा तुम्हीं

प्रेम देत दस्तक प्रिये , खोलो दिल के द्वार |
छोटी सी है जिंदगी , कर लो थोड़ा प्यार ||

पिया तुम्हारे प्रेम में , गई स्वयं को भूल |
अब पथ में चिन्ता नहीं , मिले फूल या शूल ||

तुम्हीं प्रेम पूजा तुम्हीं , जपूँ तुम्हें दिन रैन |
फिर क्यों तुम इतना मुझे, करते हो बेचैन ||

यही प्रीत की रीत है , क्यों पछताऊँ मीत |
हार गई खुद को भले , लिया तुम्हें पर जीत ||

बूँद स्वाति की भावना , हृदय सीप है मीत |
प्रेम रत्न मोती सदृश, बना काव्य नवनीत ||

अक्षर अक्षर जोड़ के , सुनो प्रिये मन मीत |
तुमको मैनें लिख दिया , छन्द बद्ध कर गीत ||

जुड़ते हैं ज्यों प्रेम से , दो हृदयों के तार |
उठे तरंगें एक में , दूजे में झनकार ||

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