कलियुग में भी होते हैं श्रवण कुमार

अबतक तक हम घरों की विशेष साफ सफाई दीपावली से पहले लक्ष्मी जी के स्वागतार्थ करते आये हैं किन्तु काबिले तारीफ हैं आज की पीढ़ी जो अपने पेरेंट्स के स्वागतार्थ उनके आने की सूचना पाते ही घरों की साफ सफाई में लग जाते हैं ! धन्य हैं वे माता पिता जिनकी सन्ताने उन्हें इतना मान देतीं हैं! उन धन्य माताओं में से एक मैं भी हूँ!

हुआ यूँ कि इस बार मार्च में होली के ठीक दो दिन पहले पतिदेव अचानक बंगलूरू जाने के लिए फ्लाइट का टिकट लेते आये थे जबकि हमने अपने मायके और ससुराल ( बलिया ) जाने की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन बात जब बच्चों के यहाँ जाने की थी तो मन में खुशी के साथ – साथ तन में अचानक स्फूर्ति भी भर गयी और मैं बंगलूरू जाने की तैयारी करने लगी! चूंकि होली का समय था इसलिए गुझिया, लड्डू, नमकीन आदि जल्दी जल्दी में जितना भी हो सका अपनी सहायिका की सहायता से बनाकर फटाफट अपना बैग पैक कर ली ! पतिदेव तो चाहते थे कि इसबार चलो हम लोग ही बच्चों को सरप्राइज दें लेकिन मुझे डर था कि कहीं सरप्राइज के चक्कर में हम ही न सरप्राइज्ड हो जायें क्यों कि वीकेंड में तो इनलोगों का प्रोग्राम फिक्स रहता है कहीं घूमने का.. इसीलिए छोटे बेटे को बता दी थी यह कहकर कि अपने भाई को मत बताना उसको सरप्राइज देना है!लेकिन बात भाई – भाई की थी इसलिए छोटे भाई अपने बड़े भाई को यह बताने से कैसे चूकते कि पटना से उड़ाकादल आ रहा है भाई सजग हो जाओ !
बंगलूरू एयरपोर्ट पर जैसे ही फ्लाइट लैंड की बेटे का काॅल आ गया कि हम एयरपोर्ट आ गये हैं जबकि हमने कई बार मना किया था कि मत आना हम कैब लेकर आ जायेंगे! हम सामान लेकर बाहर निकले .. तभी देखा काले रंग की चमचमाती हुई गाड़ी हमारे सामने आकर रुकती है एक बेटा ड्राइविंग सीट पर है और दूसरा बेटा उतरकर हम लोगों का पैर छूकर झट से सामान डिक्की में रखा और हम चल दिये अपने गन्तव्य स्थल की तरफ़ ! गाड़ी में गाना हमारे ही पसंद का बज रहा था पतिदेव की प्रसन्नता उनके चेहरे पर स्पष्ट दिखाई दे रही थी !
कुछ दूर बढ़ते ही गाड़ी किसी फाइव स्टार होटल में रुकी ! खाना पीना वहीं हुआ ! पतिदेव अभी अपने पर्स से क्रेडिट कार्ड निकाल ही रहे थे कि बेटे ने अपने कार्ड पहले ही पेमेंट कर दिया!
खाने के बाद हम बेटों घर पहुंचे ! दरवाजा जैसे ही खुला चमचमाता हुआ फर्श और दिवारें जैसे नये वस्त्र पहनकर हमारे स्वागत के लिए तैयार हो गयीं थीं! मेरे तो आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा कि आखिर इतना घर चमक कैसे रहा है लेकिन अपने कौतूहल को छुपाते हुए पहले खूब तारीफ़ कर दी! दोनों बेटे एकदूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे!
अंत में छोटा बेटा धीरे से सफाई वाला राज खोल ही दिया !
बताया कि अब तो सारी सुविधाएँ आॅनलाइन उपलब्ध हैं ही इसलिए आपलोगों के आने की खबर सुनकर कल हमलोग छुट्टी ले लिये तथा एकदिन के अन्दर ही घर की साफ सफाई और पेंट पाॅलिश करा डाली!
उसके बाद बेटों ने कहा जल्दी सो जाइये सुबह – सुबह ही हम लोग रामेश्वर और कन्या कुमारी चलेंगे यह सुनकर तो हम और भी खुश हो गये कि जो बेटे हमारे पूजा पाठ से इतना परेशान रहते हैं वे ही हमें खुद तीर्थ यात्रा पर ले जा रहे हैं! वैसे भी मैं जब भी बंगलूरू जाती हूँ पूजन सामग्री के साथ-साथ एक बोतल गंगाजल जरूर ले जाती हूँ सो इसबार भी ले गई थी और गंगाजल तो सबसे पहले ही रख ली !
बच्चों के साथ सफ़र वह भी उनके हिसाब से कुछ ज्यादा ही आनन्द दायक था!
मीनाक्षी मंदिर रास्ते में पहले ही पड़ रहा था सो वहाँ भी हम दर्शन कर लिये! मंदिर की कलाकृति और भव्यता तो देखते ही बनती थी!
रास्ते में खाते पीते रात में हम रामेश्वरम् पहुंचे! चौदह घंटे के सफ़र के बाद शरीर तो थककर चूर चूर हो गया था इसलिए जल्दी ही सो गये कि सुबह में मंदिर में आराम से दर्शन होगा!
सुबह तीन बजे अपनेआप नींद भी खुल गई तो हम नहा धोकर मंदिर में पहुंचे! मंदिर में दर्शन का फल क्या मिलेगा यह तो बाद की बात थी उस समय तो हम मंदिर की कलाकृति ही देखते रह गये , साथ-साथ पंडा मंदिर की कहानी सुना रहा था और मंदिर के हर ( 22) कुंए से स्नान कर हम जल्दी जल्दी भगवान के दर्शन के लिए हाथ में गंगाजल लेकर लाइन में लग गये ! गंगाजल देखकर मंदिर का पंडा बहुत खुश हुआ था इसलिए सबसे पहले हमारे द्वारा ले गये गंगाजल से अभिषेक हुआ जिसे हम ईश्वरीय कृपा ही समझ रहे थे!
रामेश्वरम् दर्शन के उपरान्त रामसेतु और कन्या कुमारी के लिए निकल पड़े! गाड़ी सड़क पर और सड़क के दोनों किनारे हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी का खूबसूरत दृश्य कुछ स्वर्ग सा ही एहसास करवा रहा था! तीर्थ यात्रा बहुत ही सुखद और खास रही क्यों कि बेटों ने करवाई थी!
फिर हम कैसे कह सकते हैं कि श्रवण कुमार सिर्फ सतयुग में ही पैदा हुए हैं! हाँ सतयुग के श्रवण कुमार कांवड़ पर बिठा कर अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा करवाए तो कलियुग के बेटे गाड़ी से !

©किरण सिंह

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