चुटकी भर सिंदूर से

चुटकी भर सिंदूर से , गयी स्वयं को हार |
इतराई सौभाग्य पर , कर सोलह श्रृंगार ||

चूड़ी कंगन हथकड़ी , पायल बेड़ी पाँव |
बंधन मंगल सूत्र का , नाक नथनिया ठाँव ||

बिंदी है मन मोहिनी , जादूगर सिंदूर |
संग सात फेरे लिये , कैसे होगे दूर ||

नयनो में सपने नये , उर में भर ली प्रीत |
प्रिय मैं तुममें यूँ मिली , जैसे सुर संगीत ||

प्रिय मैं ठहरी बावरी , मैं क्या जानूँ प्रीत |
तुम ही मेरे छन्द हो , तुम ही मेरे गीत ||

पिया तुम्हारे प्रेम में , गई स्वयं को भूल |
अब पथ में चिन्ता नहीं , मिले फूल या शूल ||

साथ सजन के मैं चली , बनकर आधा अंग |
जैसे सूरज के किरण , रहती हरदम संग ||

2 विचार “चुटकी भर सिंदूर से&rdquo पर;

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