शीघ्र उगो तुम चन्द्रमा

शीघ्र उगो तुम चन्द्रमा, आज करो मत रार |
दूंगी मैं तुमको अरघ, कर सोलह श्रृंगार |

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नवरात्रि

हिन्दू धर्म में व्रत तीज त्योहार और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। हर वर्ष चलने वाले इन उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों को हिन्दू धर्म का प्राण माना जाता है इसीलिये अधिकांश लोग इन व्रत और त्योहारों को बेहद श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं।

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बाढ़

रोये हो किस बात पर, कहो गगन इस बार?
क्यों अँसुअन में डूबकर, धरती करे गुहार??

पानी – पानी तंत्र है , डूबा राज्य बिहार ।
देखो पानी ने किरण , पानी दिया उतार।।

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जय माँ


ईशाना , सत्या , शिवा , नित्या दुर्गा नाम |
सर्व मंगला अम्बिका,शत् शत् तुम्हें प्रणाम ||
वाम हस्त शोभित कमल , दाएँ हाथ त्रिशूल |
शैलपुत्री वृष वाहिनी , क्षमा करो माँ भूल ||

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दलित बाभन

ब्रम्ह की लिखी कहानियाँ तो हमारे आस-पास में बिखरी पड़ी हैं जिसे हुनरमंद लेखनी पन्नों पर उतार कर जन – जन तक पहुँचाने में सफल हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही करिश्मा शम्भू पी सिंह जी की लेखनी कर गई है जिसकी बदौलत खूबसूरत तथा रोचक कहानियों का संग्रह दलित बाभन खूबसूरत कवर पृष्ठ में सुसज्जित होकर पाठकों का ध्यान स्वतः ही अपनी ओर आकृष्ट कर रही हैं ।

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भैरवी

आज यूँ ही समाचार पत्र पर साहित्य पेज को पलटा तो एक जानी पहचानी सी खूबसूरत तस्वीर पर मेरी नज़रें ठहर गईं ! फिर नाम मैंने नाम देखा तो भैरवी ! बला की खूबसूरत तो थी ही अब तो भैरवी और भी खूबसूरत लग रही थी इस तस्वीर में ! देखकर तो ऐसा लग रहा था कि यदि सौन्दर्य की प्रतियोगिता रखी जाय और उसकी प्रतिद्वंद्वी मेनका भी हो तो भी प्रथम स्थान भैरवी को ही मिलना तय होता ! मैंने उसकी लिखी गज़ल को कई बार पढ़ा और अपने हृदय में उठे प्रश्नों का उत्तर ढूंढते – ढूंढते स्मृतियों में विचरण करने लगा!

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