दूल्हा माँगे वोट

बाराती सज – धज चले , दूल्हे हैं बेहाल ।
दूल्हन कुर्सी हाथ में , लिये खड़ी वरमाल।

लिये खड़ी वरमाल, सोचती अपने मन में।
किसकी होगी जीत, स्वयंवर के इस क्षण में।

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माँ

संस्कार तुमने दिया, दिया नया आयाम।
माँ तुम हो सर्वोपरी, शत् शत् तुम्हें प्रणाम।।

माँ तेरा आँचल लगे, सुंदरतम् संसार।
तू ही मेरी गुरु प्रथम, तू ही पहला प्यार।

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बागवान

#बागवान नाम सुनते ही हमारे आँखों के सामने हेमामालिनी और अमिताभ बच्चन की फिल्म आँखों के सामने घूमने लगती है। वाकई इस फिल्म की पटकथा बहुत ही हृदय स्पर्शी और मार्मिक है जिसको बहुत ही खूबसूरती से फिल्माया गया है।
प्रायः फिल्मों और कहानियों में किसी एक पक्ष को नायक तथा दूसरे पक्ष को खलनायक दिखा दिया जाता है जो कि पूर्ण सत्य नहीं होता है। और जहाँ सवाल बुजुर्गों का आता है तब तो समूचे युवा पीढ़ी को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है चाहे वह कितनी ही समस्याओं से जूझ क्यों न रहीं हों।

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आई हैव अ प्राब्लम

तब मैं फेसबुक पर नई नई आई थी। मदर्स डे था और सभी फेसबुक फ्रेन्ड्स के बेटे – बेटियाँ बड़े ही खूबसूरत और प्यारे शब्दों में शुभकामनाएँ दे रहे थे जिसे पढ़कर मुझे खुशी तो बहुत हो रही थी लेकिन कहीं न कहीं मेरे मन के कोने में भी एक चाहत थी कि काश मेरे बेटे भी मुझे ऐसी ही कुछ शुभकामनाएँ भेजते।

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