ढूंढते – ढूंढते

बहुत याद आती है गीता की! सन 1981, में नवी कक्षा से ही हम दोनों की दोस्ती हुई थी ! गीता बला की खूबसूरत थी इसीलिए शायद नज़र बचाने के लिए ईश्वर ने उसके नाक पर एक तिल लगा दिया था साथ ही पढ़ने में भी अव्वल थी इसलिए हर कोई उससे दोस्ती करना चाहता था लेकिन मैं खुश नसीब थी इसलिये वो मेरी पक्की सहेली बन गई ! हमारी दोस्ती की चर्चा पूरे स्कूल में थी कुछ लड़कियों को तो इर्ष्या भी होती थी हमारी दोस्ती को देखकर !

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शिघ्र उगो तुम चन्द्रमा

शिघ्र उगो तुम चन्द्रमा, आज करो मत रार |
दूंगी मैं तुमको अरघ, कर सोलह श्रृंगार |

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आज सोलह श्रृंगार कर लूंगी

आज सोलह श्रृंगार कर लूंगी
मैं सितारों से माँग भर लूंगी

टूट कर तारे ज्यों ही गिरेंगे
आँचल में मैं उन्हें भर लूंगी

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