मेंहदी

एक जमाना था
जब मेंहदी की पत्तियों को
तोड़ कर
सिल पर महीन पीस कर
सीक के सहारे
हथेलियों पर उकेर दिये जाते थे
फूल पत्तियों के मध्य
पिया का नाम

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मंगलसूत्र

जो दीप्ति हमेशा सुहाग चिन्हों का मजाक उड़ाने में जरा भी संकोच नहीं करती थी आज अचानक करवा चौथ के दिन छत पर चाँद को अर्घ्य देते हुए अपनी सहेली कामिनी के सोलह श्रृंगार से सजे हुए रूप लावण्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी ! जब कामिनी हाथ में चलनी लेकर अपने चाँद को निहार रही थी तो तो सच में कामिनी के मुखड़े की दमक के सामने चाँद का भी चमक फीका पड़ गया था ! जब कामिनी का पति अर्नव अपनी पत्नी कामिनी को प्यार से पानी पिलाकर व्रत खोल रहा था तो दीप्ति कामिनी के सौन्दर्य का जादुई रहस्य समझने की कोशिश कर रही थी कि आखिर यह चमत्कार उसके सोलह श्रृंगार की वजह से हुआ या फिर उसके पति के प्यार की वजह से !दीप्ति बार – बार कल्पना के आइना मे निहारती हुई खुद और कामिनी के सौन्दर्य की तुलना करते हुए अतीत में चली गई !

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आई लव यू टू 

अंश क्लास टेस्ट के पेपर पर अपने पापा की साइन करवा कर अपनी क्लास टीचर ज्योति को जैसे ही दिखाया तो ज्योति बार – बार उलट – पुलट कर उस साइन को देखने लगी क्योंकि साइन और नाम दोनो ही कुछ जाना – पहचाना सा लगा उसे !

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