गणेश चतुर्थी व्रत कथा

शिवपुराण में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मंगलमूर्ति गणेश की अवतरण-तिथि बताया गया है जबकि गणेशपुराण के मत से यह गणेशावतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। गण + पति = गणपति। संस्कृतकोशानुसार ‘गण’ अर्थात पवित्रक। ‘पति’ अर्थात स्वामी, ‘गणपति’ अर्थात पवित्रकोंके स्वामी।

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हरतालिका तीज व्रत कथा

हरतालिका तीज व्रत माता पार्वती के पुनः भगवान शिव को पति केरूप में प्राप्त करने के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार पार्वती जी ने शंकर जी को पति के रूप में हर जन्म में पाने के लिए कठोर तप किया था। वैसा ही सौभाग्य पाने के लिए सुहागिन स्त्रियां इस व्रत को करती है।

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छेड़ो मत नटखट

यमुना के तट पर, छेड़ो मत नटखट |
छोड़ दो कलाई मोहे भरना है गगरी ||

लेने दो न चैन मोहे करो न बेचैन श्याम |
विनती करूँ मैं तोरी छोड़ मोरी तगड़ी ||

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मैया पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी

मैया पनघट पर मैं नहीं जाऊँगी ,
तेरो लल्ला बड़ा छलिया है

बंशी बजाई के मोहे बुलावे
मधुर मधुर वह राग सुनावे
खो जाऊँ मैं बंशी की धुन सुन
दिन में ही सुन्दर सपने बुन
भूली अगर मैं पनिया भरन
तो मैं क्या – क्या बहाना बनाऊँगी
तेरो लल्ला बड़ा…………….

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श्याम सलोने आओ जी

हे श्याम सलोने आओ जी
अब तो तुम दरस दिखाओ जी

आओ मधु वन में मुरलीधर
प्रीत की बंशी बजाओ जी

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