अजातशत्रु

जननायक विचारक कवि अजातशत्रु
भारत रत्न भूषित अटल बिहारी जी

राजनीति से परे सोचते थे देश हित
गाते नव गीत नीत अटल बिहारी जी

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आजादी का उत्सव

आजादी का उत्सव है यह पावन पर्व हमारा |
लाल किले पर लहर – लहर लहराये तिरंगा प्यारा |
हे जननी हे जन्मभूमि हम नमन तुम्हें करते हैं |
नमन तुम्हारे रणवीरों को जिसने तुम्हें संवारा |

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जाने से पहले

जाना तो
है ही
कभी न कभी
हमें भी
किसी दिन
इसलिये तो
जी चाहता है
कुछ कह लें कुछ सुन लें
जाने से पहले

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कैसे तुम्हें मनाऊँ मैं

तुम्हें छोड़ूँ तो कलम चले नहीं
क्या लिखूं क्या गाऊँ मैं
रूठे तुम हो तुम ही बोलो
कैसे तुम्हें मनाऊँ मैं

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आज फिर से मन मेरा

आज फिर से मन मेरा भीग जाना चाहता है

तोड़ कर उम्र का बन्धन
सावन का करें अभिनंदन
गीत गा बरखा के संग – संग
नृत्य करना चाहता है
आज फिर से मन मेरा………………….

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मित्रता

तप्त हृदय को , सरस स्नेह से ,
जो सहला दे , मित्र वही है।

रूखे मन को , सराबोर कर,
जो नहला दे , मित्र वही है।

प्रिय वियोग ,संतप्त चित्त को ,
जो बहला दे , मित्र वही है।

अश्रु बूँद की , एक झलक से ,
जो दहला दे , मित्र वही है।

मैथिलीशरण गुप्त जी की इन चंद पंक्तियों में मित्रता को बहुत ही खूबसूरती से परिभाषित की गई है !

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